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नगर निगम ने दुकानों के किराए की वसूली तेज की: 5 साल पुराना विवाद सुलझा, 6-8 करोड़ की रिकवरी का लक्ष्य

BPC News National Desk
3 Min Read

गाजियाबाद नगर निगम ने दुकानों और कियोस्क के किराए की वसूली को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत बकाया और वर्तमान किराए को तेजी से इकट्ठा करने पर जोर दिया जा रहा है।

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के निर्देश पर चल रहे इस अभियान में निगम की टीम लगातार सक्रिय है और व्यापारियों से संपर्क कर रही है।

किराया वसूली के लिए विशेष अभियान

नगर निगम ने किराया वसूली को तेज करने के लिए विशेष कैंप का आयोजन किया है। पुरानी तहसील घंटाघर पर लगाए गए कैंप में दुकानदारों की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है।

इसके अलावा निगम मुख्यालय में भी अलग से काउंटर बनाए गए हैं, जहां व्यापारी आसानी से अपना किराया जमा कर सकते हैं।

5 साल पुराना विवाद सुलझा

नगर निगम के अनुसार, कुल 1702 दुकानों का किराया निर्धारित किया गया है। इनमें से कई दुकानों का किराया पिछले 5 वर्षों से विवादित था।

अब समिति द्वारा इन सभी विवादों का समाधान कर दिया गया है, जिससे व्यापारी बिना किसी बाधा के किराया जमा कर पा रहे हैं।

कितना है वसूली का लक्ष्य?

नगर आयुक्त ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत 6 से 8 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अभी तक करीब 10 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है और आने वाले दिनों में इसमें तेजी आने की उम्मीद है।

कहां-कहां जमा हो रहा किराया?

किराया जमा करने के लिए दो प्रमुख स्थान तय किए गए हैं:

  • पुरानी तहसील घंटाघर पर लगाया गया कैंप
  • नगर निगम मुख्यालय में विशेष काउंटर

यहां दुकानदार आसानी से अपना बकाया और चालू किराया जमा कर रहे हैं।

निगम की रणनीति और आगे की योजना

नगर निगम इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीतियां तैयार कर रहा है।

जल्द ही मोबाइल वैन और वार्ड स्तर पर टीमों को भेजने की योजना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा दुकानदारों तक पहुंच बनाई जा सके।

इससे वसूली प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।

व्यापारियों का क्या कहना है?

व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे किराया विवाद के सुलझने के बाद अब वे बिना किसी चिंता के किराया जमा कर रहे हैं।

वे नगर निगम की इस पहल का समर्थन कर रहे हैं और इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

निष्कर्ष

गाजियाबाद नगर निगम का यह अभियान उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यदि यह अभियान सफल रहता है, तो इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर होगी।

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