उत्तराखंड में पलायन की समस्या को कम करने और सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास को गति देने के लिए सरकार लगातार सक्रिय कदम उठा रही है। इसी दिशा में देहरादून स्थित सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (MPRY) और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MBADP) के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्धता और बेहतर परिणामों पर विशेष जोर दिया गया।
योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पलायन प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के कार्यान्वयन में किसी भी स्तर पर देरी या कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिलों से आने वाले प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी दी जाए और सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजनाओं के कार्यान्वयन में टारगेटेड अप्रोच अपनाई जाए ताकि गांवों में स्थायी और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।
गांवों को मॉडल बनाने की रणनीति
मुख्य सचिव ने कहा कि जिन गांवों में MPRY और MBADP योजनाएं संचालित हैं, उन्हें स्वरोजगार और आजीविका के क्षेत्र में मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाए।
इसके लिए सीमांत क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों और कमियों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उसी आधार पर योजनाओं को लागू करने पर बल दिया गया।
मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (MPRY) का उद्देश्य
यह योजना राज्य के लगभग 474 पलायन प्रभावित गांवों पर केंद्रित है।
मुख्य लक्ष्य:
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बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ना
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रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देना
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स्वरोजगार आधारित आजीविका विकसित करना
वर्ष 2025–26 में इस योजना के तहत 12 जिलों में करीब 90 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MBADP) की भूमिका
यह योजना सीमावर्ती जिलों जैसे चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चंपावत में लागू की जा रही है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य:
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दूरदराज क्षेत्रों में रोजगार सृजन
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बुनियादी ढांचे का विकास
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पर्यटन और कौशल विकास को बढ़ावा
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सीमावर्ती गांवों में स्थायी आजीविका
वर्ष 2025–26 के लिए इस योजना के अंतर्गत 155 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
योजनाओं के सकारात्मक परिणाम
बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने बताया कि इन योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव दिखने लगे हैं।
गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और लोग धीरे-धीरे अपने क्षेत्रों में लौटकर स्वरोजगार अपना रहे हैं।
अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें सचिन कुर्वे, निवेदिता कुकरेती और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार की ये योजनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन रोकने और सीमांत गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह राज्य में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।







