लोकसभा के बजट सत्र की शुरुआत से ही सदन में हंगामा और टकराव का माहौल बना हुआ है। इसी बीच सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही में स्पीकर की भूमिका पक्षपातपूर्ण रही है।
राहुल गांधी के भाषण विवाद से शुरू हुआ टकराव
बजट सत्र के पहले सप्ताह से ही लोकसभा की कार्यवाही बाधित होती रही है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
राहुल गांधी को एक पूर्व सेना प्रमुख की पुस्तक से उद्धरण देने से रोके जाने के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते सदन में लगातार हंगामा देखने को मिला।
विपक्ष का आरोप— सदन में नहीं मिल रहा बोलने का अवसर
लगातार हो रहे हंगामे के चलते स्पीकर ओम बिरला को कई बार लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी दलों का आरोप है कि
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उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा,
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स्पीकर सरकार के पक्ष में निर्णय ले रहे हैं,
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और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्षी दलों में मंथन तेज
सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच बैठकों का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित INDIA गठबंधन के कई नेता इस प्रस्ताव को लाने पर सहमत नजर आ रहे हैं।
लोकसभा के नियमों के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपना आवश्यक होता है। विपक्ष का दावा है कि आवश्यक समर्थन जुटाया जा सकता है।
कांग्रेस ने स्पीकर के बयानों पर उठाए सवाल
इस बीच कांग्रेस ने स्पीकर के कुछ बयानों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में न आने का कारण विपक्ष की ओर से “अनुचित घटना” की आशंका बताया गया था।
कांग्रेस ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह विपक्ष को बदनाम करने की कोशिश है।
प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम, लेकिन सियासी संदेश अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ एनडीए के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण इस अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम है।
हालांकि, विपक्ष के लिए यह कदम स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और राजनीतिक संदेश देने का एक माध्यम माना जा रहा है।
बजट सत्र 2026 और अधिक विवादास्पद होने के संकेत
यह घटनाक्रम बजट सत्र 2026 को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है। पहले से ही कई विपक्षी सांसदों के निलंबन, प्रधानमंत्री के धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण रद्द होने और लगातार स्थगन जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव कब और कैसे पेश करता है।









