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पतंजलि का ‘देसी गाय का घी’ खाने लायक नहीं! लैब टेस्ट में फेल, कंपनी पर ₹1.40 लाख का जुर्माना

BPC News National Desk
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पतंजलि का ‘देसी गाय का घी’ खाने लायक नहीं! लैब टेस्ट में फेल, कंपनी पर ₹1.40 लाख का जुर्माना

पिथौरागढ़, उत्तराखंड, 29 नवंबर 2025 – आयुर्वेदिक उत्पादों की दिग्गज कंपनी पतंजलि आयुर्वेद एक बार फिर गुणवत्ता विवादों के केंद्र में आ गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बाबा रामदेव की कंपनी का ‘देसी गाय का घी’ खाद्य सुरक्षा परीक्षण में पूरी तरह फेल हो गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि यह घी खाने योग्य नहीं है और इसका सेवन करने से बीमारी या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इस मामले में पतंजलि समेत तीन कारोबारियों पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया गया है

यह घटना कंपनी की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है, खासकर जब पतंजलि ‘शुद्ध’ और ‘प्राकृतिक’ उत्पादों का दावा करती रही है।

पिथौरागढ़, उत्तराखंड, 29 नवंबर 2025 – आयुर्वेदिक उत्पादों की दिग्गज कंपनी पतंजलि आयुर्वेद एक बार फिर गुणवत्ता विवादों के केंद्र में आ गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बाबा रामदेव की कंपनी का 'देसी गाय का घी' खाद्य सुरक्षा परीक्षण में पूरी तरह फेल हो गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि यह घी खाने योग्य नहीं है और इसका सेवन करने से बीमारी या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इस मामले में पतंजलि समेत तीन कारोबारियों पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
पिथौरागढ़, उत्तराखंड, 29 नवंबर 2025 – आयुर्वेदिक उत्पादों की दिग्गज कंपनी पतंजलि आयुर्वेद एक बार फिर गुणवत्ता विवादों के केंद्र में आ गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बाबा रामदेव की कंपनी का ‘देसी गाय का घी’ खाद्य सुरक्षा परीक्षण में पूरी तरह फेल हो गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि यह घी खाने योग्य नहीं है और इसका सेवन करने से बीमारी या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इस मामले में पतंजलि समेत तीन कारोबारियों पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि: सैंपल कलेक्शन से कोर्ट तक लंबा सफर

यह विवाद 2020 से चला आ रहा है। 20 अक्टूबर 2020 को पिथौरागढ़ के कासनी स्थित करण जनरल स्टोर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने पतंजलि देसी गाय के घी का सैंपल एकत्र किया था। यह रूटीन इंस्पेक्शन का हिस्सा था, लेकिन सैंपल की जांच ने सबको चौंका दिया।

प्रथम स्तर पर सैंपल को राज्य स्तरीय खाद्य परीक्षण लैब, रुद्रपुर (उधम सिंह नगर) भेजा गया, जहां घी मानक गुणवत्ता (FSSAI स्टैंडर्ड्स) के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट में घी में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी और संभावित मिलावट के संकेत मिले। पतंजलि ने आपत्ति दर्ज कराई और सैंपल को राष्ट्रीय स्तर की लैब – गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) स्थित नेशनल फूड लैबोरेटरी – में दोबारा जांच के लिए भेजने की मांग की। इसके लिए कंपनी को ₹5,000 का शुल्क भी देना पड़ा।

16 अक्टूबर 2021 को दोबारा जांच हुई, लेकिन परिणाम वही रहे। दोनों लैब रिपोर्ट्स में घी को ‘सबस्टैंडर्ड’ घोषित किया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी रितेश वर्मा ने बताया, “दोनों रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से घी की गुणवत्ता मानकों से मेल नहीं खा रही। इसका सेवन करने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है, जैसे पाचन संबंधी समस्याएं या एलर्जी।”

इसके बाद मामला पिथौरागढ़ के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर) योगेंद्र सिंह के कोर्ट में पहुंचा। 17 फरवरी 2022 को सुनवाई हुई, जहां पतंजलि को नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने बचाव में दलीलें दीं, लेकिन सबूतों के अभाव में कोर्ट ने फैसला सुनाया।

जुर्माने का विवरण: कंपनी और कारोबारियों पर कार्रवाई

कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, उसके वितरक और दुकानदार पर सख्ती दिखाई। कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया गया, जिसमें:

पतंजलि आयुर्वेद: ₹1,00,000

वितरक (कान्हा जी डिस्ट्रीब्यूटर, रामनगर): ₹25,000

दुकानदार (करण जनरल स्टोर): ₹15,000

विभाग ने स्पष्ट किया कि यह जुर्माना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 59 के तहत लगाया गया है, जो सबस्टैंडर्ड खाद्य उत्पाद बेचने पर दंड का प्रावधान करता है। पतंजलि के एक अधिकारी ने कहा, “हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और अपील पर विचार कर रहे हैं। कंपनी गुणवत्ता पर हमेशा प्रतिबद्ध रही है।”

पतंजलि पर बढ़ते सवाल: पुरानी घटनाओं का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब पतंजलि के उत्पाद गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। 2019 में पिथौरागढ़ के ही बेरिनाग बाजार से पतंजलि नव रत्न इलायची सोहन पापड़ी का सैंपल लिया गया था, जो रुद्रपुर लैब में फेल हो गया। इसके परिणामस्वरूप, कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर अभिषेक कुमार, वितरक अजय जोशी और दुकानदार लीला धर पाठक को 6 महीने की जेल और ₹5,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना हुआ था।

इसके अलावा, 2024 में पतंजलि हनी और काऊ घी के सैंपल भी विवादों में रहे। सुप्रीम कोर्ट ने भी कंपनी को 14 उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर फटकार लगाई थी, जहां लाइसेंस सस्पेंड होने के बावजूद बिक्री जारी रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक ब्रांड होने के बावजूद पतंजलि को आधुनिक खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए। डॉ. अनुराग शर्मा, खाद्य विशेषज्ञ ने कहा, “घी जैसे उत्पादों में मिलावट या प्रोसेसिंग की कमी से उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाता है। FSSAI को ऐसे मामलों में और सख्ती बरतनी चाहिए।”

उपभोक्ताओं के लिए सलाह: सावधानी बरतें

खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि पतंजलि या किसी भी ब्रांड के घी खरीदने से पहले लेबल चेक करें और FSSAI लाइसेंस नंबर सत्यापित करें। यदि कोई संदेह हो, तो स्थानीय खाद्य अधिकारी से शिकायत करें। पिथौरागढ़ में अब तक ऐसे कई सैंपल जब्त हो चुके हैं, और विभाग ने चेतावनी दी है कि दोषपूर्ण उत्पादों पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

यह मामला न केवल पतंजलि की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि भारतीय खाद्य उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को भी उजागर करता है। उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि कंपनी प्रभावित उत्पादों को वापस बुलाए और मुआवजा दे।

क्या पतंजलि इस बार सुधार के कदम उठाएगी? आने वाले दिनों में कंपनी की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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