सिद्धार्थ विहार रेजिडेंट्स एसोसिएशन द्वारा क्षेत्र की जर्जर सड़कों और उससे फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ चल रही मुहिम अब तेज होती जा रही है। स्थानीय निवासी एकजुट होकर इस समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। “टूटी सड़क” और “धूल प्रदूषण” अब इलाके की सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है।
जनता की एकजुटता बनी ताकत
रेजिडेंट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान में क्षेत्र के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। टूटी सड़कों से उठती धूल और गंदगी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह और शाम के समय धूल का गुबार पूरे इलाके में फैल जाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया के सहयोग से मुद्दा हुआ मजबूत
इस जन आंदोलन को मीडिया का भी समर्थन मिल रहा है, जिससे यह मुद्दा तेजी से संबंधित अधिकारियों और आम जनता तक पहुंच रहा है। लगातार प्रकाशित खबरों और रिपोर्ट्स के जरिए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों की समस्याएं सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि टूटी सड़कों और उड़ती धूल के कारण सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है। यह समस्या अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है।
अधिकारियों से जवाब की मांग
निवासियों ने आवास विकास परिषद और संबंधित विभागों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्षों से इस समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक इस स्थिति को नजरअंदाज किया जाएगा।
तत्काल कार्रवाई की मांग
रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़कों की मरम्मत और धूल नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
न्याय की उम्मीद में जनता
फिलहाल सिद्धार्थ विहार के निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा। यह मुहिम न केवल स्थानीय मुद्दे को उजागर कर रही है, बल्कि प्रशासन को उसकी जिम्मेदारियों का एहसास भी करा रही है।









