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बजट पर सियासी टकराव: अखिलेश यादव का तीखा हमला

BPC News National Desk
4 Min Read

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बजट को लेकर घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार के 2026-27 के बजट को ‘विदाई बजट’ करार देते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला।

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश ने कहा कि यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और यह संकेत देता है कि मौजूदा सरकार का समय समाप्त होने वाला है।

कितना बड़ा है यूपी का नया बजट?

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा पेश किया गया यह बजट करीब 9.12 लाख करोड़ रुपये का है, जो अब तक का सबसे बड़ा राज्य बजट माना जा रहा है।

सरकार के अनुसार इसमें प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास

  • कृषि सुधार योजनाएं

  • महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं

  • युवाओं के लिए रोजगार अवसर

  • सामाजिक कल्याण कार्यक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राज्य को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

अखिलेश यादव के मुख्य आरोप

🔹 खर्च नहीं हो पाता बजट

उन्होंने कहा कि बजट का आकार हर साल बढ़ रहा है, लेकिन योजनाओं पर वास्तविक खर्च पूरा नहीं हो पाता।

🔹 बेरोजगारी पर ठोस योजना नहीं

अखिलेश के अनुसार युवाओं के लिए रोजगार को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया।

🔹 किसानों को खतरा

उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का असर यूपी के किसानों पर पड़ सकता है।

🔹 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य पर सवाल

सपा प्रमुख ने कहा कि राज्य की वास्तविक जीएसडीपी और सरकारी दावों में अंतर है।

विपक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी बजट को “कागजी” और “निराशाजनक” बताया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता को केवल वादों और घोषणाओं का “सपनों का अमृत” दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई नहीं देता।

सरकार का पक्ष: विकास और निवेश पर जोर

सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया है।

सरकारी दावों के अनुसार बजट से:

  • बुनियादी ढांचा मजबूत होगा

  • निवेश बढ़ेगा

  • रोजगार के अवसर पैदा होंगे

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलेगा

2027 चुनाव से जुड़ा राजनीतिक संदेश

विशेषज्ञों के अनुसार “विदाई बजट” शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।

विपक्ष इस बजट को सरकार की कमजोरियों से जोड़कर चुनावी मुद्दा बनाना चाहता है, जबकि भाजपा इसे विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

निष्पक्ष विश्लेषण: क्या सच में ‘विदाई बजट’?

तटस्थ नजरिए से देखें तो:

✔ बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं पर जोर सकारात्मक संकेत देता है।
✔ लेकिन पिछली योजनाओं के क्रियान्वयन और रोजगार की स्थिति पर सवाल बने हुए हैं।

अंततः यह तय होगा कि यह बजट ‘विदाई’ साबित होता है या नहीं — यह पूरी तरह 2027 के चुनाव परिणाम और जमीन पर काम के असर पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

अखिलेश यादव का ‘विदाई बजट’ बयान यूपी की राजनीति में नया विवाद पैदा कर चुका है। एक तरफ सरकार इसे विकास का रोडमैप बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति के तहत मुद्दा बना रहा है।

आने वाले महीनों में बजट का असली प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि यह राजनीतिक बयानबाजी साबित होगा या सत्ता परिवर्तन का संकेत।

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