पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर प्रस्तावित एक मस्जिद के निर्माण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक तनाव तेज हो गया है। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक और जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने घोषणा की है कि 11 फरवरी को धार्मिक अनुष्ठान के साथ निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।
हुमायूं कबीर का दावा है कि यह निर्माण बेलडांगा क्षेत्र में किया जा रहा है और इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग दो साल लग सकते हैं। उनके अनुसार, इस परियोजना से जुड़े कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहल बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र कभी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है।
दिसंबर में रखी गई थी आधारशिला
रिपोर्ट्स के अनुसार, 6 दिसंबर 2025 को इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। इसे कुछ मंचों पर ‘बाबरी मस्जिद की तर्ज पर प्रस्तावित संरचना’ के रूप में प्रचारित किया गया, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। दान के माध्यम से धन जुटाए जाने और निर्माण एजेंसी के चयन की भी जानकारी सामने आई है।
विरोध और सियासी बयानबाज़ी
इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के कुछ हिंदू संगठनों ने इसका विरोध जताया है और मुर्शिदाबाद की ओर मार्च का आह्वान किया है। संगठनों का कहना है कि वे किसी भी विवादित प्रतीकात्मक निर्माण का विरोध करेंगे।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बयान देते हुए कहा कि बाबरी ढांचे से जुड़ा अध्याय इतिहास का हिस्सा बन चुका है और इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे। उनके बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो गई हैं।
चुनावी माहौल में बढ़ी संवेदनशीलता
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर स्थिति को गंभीरता से न संभालने का आरोप लगाया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने पूरे विवाद को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
प्रशासन अलर्ट मोड में
मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन और पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है और किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए बल तैनात किया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर ही कोई भी गतिविधि की अनुमति दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में राजनीतिक ध्रुवीकरण को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में प्रशासन और न्यायिक प्रक्रियाओं की भूमिका इस विवाद की दिशा तय करेगी।








