भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए पटाखों को मुख्य जिम्मेदार ठहराते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने देशभर में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
मेनका गांधी ने पटाखे फोड़ने वालों को ‘एंटी-नेशनल’ (देशद्रोही) करार देते हुए कहा कि इस गतिविधि से पूरे समाज को नुकसान पहुंचता है।
“दो रातों में 800 करोड़ के पटाखे, हवा जहरीली”
मीडिया से बातचीत में मेनका गांधी ने कहा कि:
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दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण पटाखे हैं
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दिवाली के बाद प्रदूषण अचानक बढ़ जाता है
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त्योहार से पहले हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “दो रातों में 800 करोड़ रुपये के पटाखे फोड़े जाते हैं, जिससे हवा जहरीली हो जाती है।”
‘ग्रीन पटाखों’ की अवधारणा पर सवाल
मेनका गांधी ने ‘ग्रीन पटाखे’ की अवधारणा को खारिज करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है।
उन्होंने कुछ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भी सवाल उठाए और कहा कि ज़मीनी स्तर पर इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
जनता से आंदोलन की अपील
मेनका गांधी ने लोगों से अपील की कि:
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केवल सरकार से उम्मीद न रखें
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खुद आगे आकर प्रदूषण के खिलाफ आंदोलन करें
उन्होंने कहा कि पटाखे फोड़ने वाले लोग ही बाद में सबसे ज्यादा शिकायत करते हैं।
पराली और वाहनों को दोष देने पर भी टिप्पणी
मेनका गांधी ने पराली जलाने और वाहनों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताने को गलत और भ्रामक करार दिया।
उनका कहना था कि इन मुद्दों पर ध्यान भटकाया जाता है, जबकि असली समस्या पटाखे हैं।
बयान के बाद सियासी और सामाजिक बहस तेज
मेनका गांधी के इस बयान के बाद:
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पर्यावरण कार्यकर्ता उनकी मांग का समर्थन कर रहे हैं
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कुछ लोग इसे सांस्कृतिक परंपराओं पर हमला बता रहे हैं
सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी बहस चल रही है।
दिल्ली में पहले से लागू है आंशिक प्रतिबंध
दिल्ली में सर्दियों के दौरान पहले से ही पटाखों पर आंशिक प्रतिबंध लगाया जाता है।
हालांकि, प्रवर्तन की कमी के चलते समस्या बनी रहती है और हर साल AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि:
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पटाखे प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत हैं
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लेकिन वाहन, निर्माण कार्य और पराली जैसे अन्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
संतुलित और समग्र नीति की जरूरत बताई जा रही है।
‘बहुत खराब’ श्रेणी में AQI
यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली-एनसीआर में AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है।
लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
मेनका गांधी की मांग पर अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।










