नरेंद्र मोदी आगामी 14 अप्रैल को दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने जा रहे हैं। लेकिन उद्घाटन से पहले ही एक्सप्रेसवे के नामकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
चंद्रशेखर आजाद की नई मांग
चंद्रशेखर आजाद, जो आजाद समाज पार्टी के प्रमुख हैं, ने एक्सप्रेसवे का नाम बदलने की मांग उठाई है। उन्होंने नितिन गडकरी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि इस एक्सप्रेसवे का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा जाए।
पत्र में रखी गई भावनात्मक अपील
चंद्रशेखर आजाद ने अपने पत्र में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने देश के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उनके नाम पर इस महत्वपूर्ण परियोजना का नामकरण करना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे समाज के वंचित वर्गों में सम्मान और प्रेरणा की भावना मजबूत होगी।
उद्घाटन से पहले बढ़ी राजनीतिक चर्चा
एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से ठीक पहले इस मांग के सामने आने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर सरकार इसे विकास और कनेक्टिविटी का बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर नामकरण को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
यात्रा और विकास को मिलेगा बढ़ावा
दिल्ली से देहरादून के बीच बनने वाला यह एक्सप्रेसवे यात्रा समय को करीब ढाई घंटे तक सीमित कर देगा। इससे उत्तराखंड के पर्यटन, व्यापार और कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है।
फैसले पर टिकी सबकी नजरें
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। क्या एक्सप्रेसवे का नाम यथावत रहेगा या फिर इसे डॉ. अंबेडकर के नाम से जोड़ा जाएगा—इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
उद्घाटन के साथ बढ़ेगा राजनीतिक विमर्श
14 अप्रैल को होने वाला उद्घाटन जहां विकास के इस बड़े प्रोजेक्ट को जनता को समर्पित करेगा, वहीं नामकरण को लेकर उठी बहस राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को और गहरा कर रही है।






