कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर आज श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर धाजारहण के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचे। यह पहला अवसर था जब प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मंदिर के गर्भगृह के ऊपर विशाल भगवा ध्वज लहराया गया। रामलला के दर्शन कर और पूर्ण विधि-विधान से ध्वजारोहण करने के बाद प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
अपने संक्षिप्त किन्तु ओजपूर्ण उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने कहा,
“अयोध्या केवल एक शहर नहीं, यह भारत की आत्मा है। अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है, अगर समाज को सच्चे अर्थों में सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमें अपने भीतर के ‘राम’ को जगाना होगा। हमें अपने अंतर्मन में राम की प्राण-प्रतिष्ठा करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा,
“राम मंदिर का यह भगवा ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं है। यह त्याग, तपस्या, संकल्प और सनातन संस्कृति की विजय का प्रतीक है। जब तक यह ध्वज लहराता रहेगा, भारत की आस्था और अस्मिता अडिग रहेगी।”
भगवा ध्वज का विशेष महत्व
कार्तिक पूर्णिमा को देव-दीपावली के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन राम मंदिर में पहली बार धर्म-ध्वज फहराने की परंपरा शुरू की गई है। 108 फुट ऊंचे ध्वज-दंड पर 21×31 फुट का विशाल भगवा ध्वज लहराया गया, जिस पर स्वर्णिम अक्षरों में ‘जय श्री राम’ अंकित है। ध्वजारोहण से पहले मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूरी अयोध्या राममय हो गई।
प्रधानमंत्री ने रामलला का दर्शन किया, माथा टेका और मंदिर परिक्रमा करते हुए संतों-महंतों से आशीर्वाद लिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी मौजूद रहे।
2047 का रामराज्य
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि विकसित भारत का मतलब केवल जीडीपी और इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। विकसित भारत वह होगा जहाँ हर नागरिक के भीतर मर्यादा, कर्तव्य, सत्य और सेवा का भाव जागृत हो। “जब हर हृदय में राम बसेंगे, तभी रामराज्य साकार होगा,” उन्होंने कहा।
ध्वजारोहण के बाद जब भगवा ध्वज हवा में लहराया तो पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ के जयघोष से गूंज उठा। दूर तक दिखता यह भगवा रंग मानो पूरे देश को संदेश दे रहा था, राम लौट आए हैं, और अब भारत फिर से विश्व गुरु बनने की राह पर है।










