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नए भारत की कार्य संस्कृति का प्रतीक: प्रो-एक्टिव गवर्नेंस और टाइमली इम्प्लीमेंटेशन

BPC News National Desk
4 Min Read

आज का भारत विकास की नई गति से आगे बढ़ रहा है। जहां पहले शासन व्यवस्था में देरी, लालफीताशाही और रिएक्टिव अप्रोच आम थी, वहीं अब प्रो-एक्टिव गवर्नेंस और टाइमली इम्प्लीमेंटेशन नई कार्य संस्कृति का मूल मंत्र बन चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है, जब उन्होंने प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म को ‘नए भारत’ की कार्य संस्कृति का जीवंत उदाहरण बताया।

PRAGATI प्लेटफॉर्म: सोच बदलने वाला सिस्टम

प्रगति प्लेटफॉर्म की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में की थी। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और तेज क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था।
लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शब्दों में, अब यह सिर्फ प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग टूल नहीं रहा, बल्कि पूरे शासन तंत्र की कार्यशैली बदलने वाला माध्यम बन चुका है।

प्रो-एक्टिव गवर्नेंस का वास्तविक अर्थ

प्रो-एक्टिव गवर्नेंस का मतलब है:

  • समस्या आने से पहले ही समाधान खोजना,

  • योजनाओं को समय से पहले शुरू करना,

  • और चुनौतियों को तुरंत पहचानकर दूर करना

पहले व्यवस्था यह थी कि विभाग समस्या बताते थे, मीटिंग्स में लंबी बहस होती थी और फैसला टल जाता था।
अब फोकस समस्या पर नहीं, समाधान पर है।

योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि:

“प्रगति प्लेटफॉर्म ने सरकारी कामकाज की सोच और दिशा दोनों बदल दी हैं। अब बैठकों में बहाने नहीं, समाधान तय होते हैं।”

टाइमली इम्प्लीमेंटेशन: विकास की असली ताकत

टाइमली इम्प्लीमेंटेशन यानी काम समय पर पूरा होना।
उत्तर प्रदेश में इस सिद्धांत को अपनाकर:

  • समय की बर्बादी रुकी,

  • लागत नियंत्रण में आई,

  • और परियोजनाएं समय पर पूरी होने लगीं

आज यूपी:

  • एक्सप्रेसवे,

  • मेट्रो प्रोजेक्ट्स,

  • एयरपोर्ट्स,

  • औद्योगिक कॉरिडोर,

  • और निवेश परियोजनाओं
    के मामले में देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

प्रगति समीक्षा बैठकों में मुख्यमंत्री:

  • सीधे अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट लेते हैं,

  • अड़चनों को तुरंत हटाते हैं,

  • और जवाबदेही तय करते हैं

उत्तर प्रदेश: प्रो-एक्टिव अप्रोच का जीवंत उदाहरण

योगी सरकार ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत को प्रगति के माध्यम से जमीन पर उतारा है।
राज्य में:

  • कानून-व्यवस्था सुधार,

  • निवेश सम्मेलन,

  • औद्योगिक विकास,

  • और रोजगार सृजन
    हर क्षेत्र में प्रो-एक्टिव अप्रोच दिखाई देती है।

हजारों करोड़ का निवेश, तेज क्रियान्वयन

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश ने:

  • हजारों करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है,

  • जिनका क्रियान्वयन रिकॉर्ड गति से हो रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि 2026 को ‘उम्मीदों का वर्ष’ बनाया जाए। इसके तहत:

  • 1.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां,

  • बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स,

  • और AI आधारित स्वास्थ्य सेवाएं
    समयबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी।

नया भारत, नई कार्य संस्कृति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शब्दों में:

“प्रगति केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्य संस्कृति है।”

यह संस्कृति हमें:

  • रिएक्टिव से प्रो-एक्टिव,

  • देरी से समयबद्धता,

  • और बहाने से समाधान की ओर ले जाती है।

जनता में बढ़ता विश्वास और उम्मीद

इस नई कार्य संस्कृति का असर सिर्फ फाइलों और परियोजनाओं तक सीमित नहीं है।
यह:

  • नागरिकों में विश्वास जगा रही है,

  • युवाओं में उम्मीद भर रही है,

  • और शासन में पारदर्शिता ला रही है।

बाकी राज्यों के लिए प्रेरणा

योगी आदित्यनाथ का यह मॉडल आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही कार्य संस्कृति अन्य राज्यों में अपनाई जाए, तो भारत का विकास और भी तेज हो सकता है।

नए भारत का संकल्प

नए भारत का यही संकल्प है:

“काम समय पर, पारदर्शी तरीके से और जन-कल्याण के लिए।”

प्रो-एक्टिव गवर्नेंस और टाइमली इम्प्लीमेंटेशन के जरिए भारत अब सिर्फ योजनाएं नहीं बना रहा, बल्कि उन्हें जमीन पर उतार भी रहा है।

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