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राजनगर एक्सटेंशन की ‘मौत की सड़क’ निलय ग्रीन रोड ने फिर ली एक जान, मोहित शर्मा की मौत से प्रशासन पर उठे सवाल

BPC News National Desk
4 Min Read
राजनगर एक्सटेंशन की निलय ग्रीन रोड, जिसे स्थानीय लोग ‘मौत की सड़क’ कहते हैं

राजनगर एक्सटेंशन की कुख्यात निलय ग्रीन रोड, जिसे स्थानीय लोग ‘मौत की सड़क’ के नाम से जानते हैं, ने एक बार फिर एक युवा की जान ले ली। मंगलवार देर रात नोएडा से ड्यूटी कर घर लौट रहे 25 वर्षीय मोहित शर्मा की तेज रफ्तार बड़े वाहन से टक्कर में दर्दनाक मौत हो गई।

मोहित निलय ग्रीन सोसायटी के बी-टावर, फ्लैट नंबर 604 में रहते थे और नोएडा सेक्टर-73 स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। हादसे के बाद उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

सात हाईराइज सोसायटियों के बीच ‘खूनी रास्ता’

यह सड़क राजनगर एक्सटेंशन की सात प्रमुख हाईराइज सोसायटियों—दिया ग्रीन, निलय ग्रीन, महाकजीवन, राज विला, संचार, मिडोस और मोती—के बीच से गुजरती है। हजारों परिवारों की रोजमर्रा की आवाजाही इसी संकरी और जर्जर सड़क पर निर्भर है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर न तो पर्याप्त चौड़ाई है, न स्पीड ब्रेकर, न स्ट्रीट लाइट और न ही फुटपाथ या डिवाइडर। रात के समय यहां से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है।

चार साल में 16 मौतें, फिर भी नहीं बदली व्यवस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इस सड़क पर 16 लोगों की मौत हो चुकी है। मोहित शर्मा की मौत इस श्रृंखला की 16वीं घटना है। इसके बावजूद न तो ट्रैफिक प्लान बदला गया और न ही सड़क सुधार की कोई ठोस कार्रवाई हुई।

हाल ही में 2 फरवरी को निलय ग्रीन सोसायटी की तृप्ति स्कूल जाते समय ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, लेकिन उस घटना के बाद भी प्रशासन ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

जीडीए और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

निवासियों ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जीडीए सिर्फ कागजी योजनाओं, बैठकों और आश्वासनों तक सीमित रह गया है।

सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाएं वर्षों से लंबित हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर हादसे के बाद सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, जमीन पर कोई बदलाव नहीं होता।

NHRC के नोटिस के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं

निवासियों के मुताबिक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सड़क की बदहाली को लेकर जीडीए को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद न तो अस्थायी स्पीड ब्रेकर लगाए गए, न लाइटिंग की व्यवस्था हुई और न ही भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई।

इससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और गहराती जा रही है।

मोहित की मौत के बाद फूटा लोगों का गुस्सा

मोहित शर्मा की मौत के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों ने सड़क घेराव कर प्रदर्शन किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए—

  • क्या 16 मौतें भी सड़क सुधार के लिए काफी नहीं हैं?

  • NHRC के नोटिस के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  • हादसों के बावजूद ट्रैफिक प्लान क्यों नहीं बदला गया?

लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रशासनिक उदासीनता पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता और बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर करती है। हजारों परिवारों की सुरक्षा इस सड़क से जुड़ी हुई है, लेकिन हर हादसे के बाद कार्रवाई का इंतजार ही रह जाता है।

अब देखना यह है कि एक और परिवार का चिराग बुझने के बाद प्रशासन कब जागता है और इस ‘मौत की सड़क’ को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाता है।

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