सेना दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने सरकार से दो टूक शब्दों में मांग की है कि सैनिकों का वेतन टैक्स मुक्त किया जाए। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने कहा कि केवल “हमें आप पर गर्व है” कह देने से सैनिकों का सम्मान पूरा नहीं होता, बल्कि इसके लिए ठोस और संवेदनशील नीतिगत फैसले जरूरी हैं।
यह बयान उन्होंने संस्था के मुख्यालय 133 बी, मॉडल टाउन ईस्ट, गाजियाबाद में आयोजित ऑनलाइन बैठक के दौरान दिया।
“क्या पूर्व सैनिक को जिंदा शहीद कहना गलत होगा?”
कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने भावुक शब्दों में कहा:
“क्या पूर्व सैनिक को जिंदा शहीद कहना गलत होगा? हर सिपाही अपने कार्यकाल में कई बार अत्यंत विषम परिस्थितियों से गुजरता है और मौत के साये में रहता है। स्कूलों में बम की धमकी से लोग घबरा जाते हैं, लेकिन सोचिए वह सिपाही क्या झेलता होगा जो माइनस 15 डिग्री तापमान में दो घंटे नहीं, बल्कि दो साल तक दुश्मन का सामना करता है।”
उन्होंने कहा कि देश के नेता, अभिनेता और प्रबुद्धजन कहते हैं कि उन्हें सैनिकों पर गर्व है, लेकिन व्यवहार में वह गर्व दिखाई नहीं देता।
शहीद स्मारक तक क्यों नहीं पहुंचते छात्र?
कर्नल त्यागी ने सवाल उठाया कि:
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कितने लोग सेना दिवस पर शहीद स्मारक पार्क जाकर श्रद्धांजलि देते हैं?
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क्या स्कूलों के प्रधानाचार्यों की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे बच्चों को शहीद स्मारकों पर लेकर जाएं, ताकि उनमें देशभक्ति और संस्कार पैदा हों?
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क्या स्कूलों में संविधान की धारा 51A में बताए गए 11 कर्तव्य पढ़ाए जाते हैं?
उन्होंने कहा कि जब बच्चे शहीदों के बलिदान को नजदीक से देखेंगे, तभी उनमें सच्ची देशभक्ति विकसित होगी।
“जय जवान, जय किसान” – लेकिन टैक्स में भेदभाव?
कर्नल त्यागी ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा:
“एक तरफ नारा दिया जाता है ‘जय जवान, जय किसान’, दूसरी तरफ किसानों का टैक्स माफ और जवानों पर टैक्स कायम।
ज़्यादातर जवान किसान परिवारों के ही बेटे होते हैं।”
उन्होंने बताया कि:
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भारत की आबादी लगभग 145 करोड़ है।
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सैनिकों की संख्या करीब 14 लाख है, यानी 1% के 1% से भी कम।
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यही 14 लाख सैनिक 8,000 किमी लंबे समुद्री तट,
चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसी लंबी सीमाओं,
और हर प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा में देश की रक्षा करते हैं।
इसके बावजूद उनके वेतन पर टैक्स लगाया जाना अन्यायपूर्ण है।
“अपने सैनिकों का श्राद्ध नहीं मनाते”
कर्नल त्यागी ने तीखे शब्दों में कहा:
“लोग अपने माता-पिता का श्राद्ध करते हैं, ऋषि-मुनियों का श्राद्ध करते हैं, लेकिन उन सैनिकों का श्राद्ध नहीं करते जिनके कारण उनका अस्तित्व बचा हुआ है।
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सरकार से दो प्रमुख मांगें
ऑनलाइन बैठक में गौरव सेनानी पी. पी. सिंह, ज्ञान सिंह, चंदन सिंह, गणेश दत्त, पुष्कर बिष्ट, अंजू शर्मा, संध्या त्यागी, मोनिका गोयल, उर्वशी वालिया, कृष्णा, प्रियांशु कुमार सहित कई सदस्यों ने भाग लिया।
सभी ने एक स्वर में सरकार से दो मांगें रखीं:
1️⃣ सैनिकों का वेतन टैक्स मुक्त किया जाए।
2️⃣ सरकार एक एडवाइजरी जारी करे कि सभी स्कूल वर्ष में कम से कम एक बार अपने छात्रों को शहीद स्मारक लेकर जाएं, ताकि उनमें देशभक्ति और संस्कार पैदा हों।
“सिर्फ भाषण नहीं, निर्णय चाहिए”
राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने स्पष्ट किया कि सैनिकों के सम्मान के लिए केवल भाषण, नारे और सोशल मीडिया पोस्ट काफी नहीं हैं, बल्कि:
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आर्थिक सम्मान,
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सामाजिक सम्मान,
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और नीतिगत सुरक्षा
देना जरूरी है।
संस्था ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो भविष्य में इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन के रूप में भी उठाया जा सकता है।









