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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने छोटे मूल्य के फ्रॉड ट्रांजैक्शन में 25,000 रुपये तक के हर्जाने की घोषणा की

BPC News National Desk
4 Min Read

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए शुक्रवार को एक अहम घोषणा की। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि छोटे मूल्य (Small-Value) के डिजिटल फ्रॉड ट्रांजैक्शन में हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने की नई रूपरेखा लाई जाएगी।

यह फैसला देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी के मामलों के बीच ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

65% फ्रॉड मामलों में नुकसान 50,000 रुपये से कम

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि बैंकों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार:

  • करीब 65% डिजिटल फ्रॉड मामलों में नुकसान 50,000 रुपये से कम होता है

  • ऐसे मामलों में अब ग्राहकों को एक बार का मुआवजा (One-Time Compensation) मिलेगा

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ग्राहक को नुकसान की राशि का 85% या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) का भुगतान किया जाएगा।

उदाहरण:
अगर किसी ग्राहक को 50,000 रुपये का नुकसान हुआ है, तो उसे कैप के कारण 25,000 रुपये मिलेंगे।

OTP शेयर करने पर भी मिलेगा मुआवजा

इस योजना की सबसे अहम बात यह है कि OTP (वन-टाइम पासवर्ड) शेयर करने पर भी ग्राहक मुआवजे के पात्र होंगे, बशर्ते:

  • फ्रॉड अनजाने में (Unintended) हुआ हो

  • ग्राहक की कोई गलत मंशा (Malafide Intent) न हो

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा:

“जब तक ग्राहक फ्रॉड का शिकार होता है — चाहे अपनी गलती से या किसी और की वजह से — कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। यदि यह अनइंटेंडेड है, तो उन्हें मुआवजा मिलेगा।”

जीवन में केवल एक बार मिलेगा यह लाभ

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यह मुआवजा:

  • प्रत्येक ग्राहक को जीवन में केवल एक बार (Once-in-a-Lifetime) मिलेगा

  • ग्राहक को 15% राशि स्वयं वहन करनी होगी (Skin in the Game), भले ही नुकसान 25,000 रुपये से कम हो

इसका उद्देश्य ग्राहकों में सतर्कता बनाए रखना भी है।

DEA फंड से दिया जाएगा मुआवजा

यह मुआवजा Deposit Education and Awareness (DEA) Fund से दिया जाएगा। इस फंड में मुख्य रूप से:

  • अनक्लेम्ड बैंक डिपॉजिट्स से होने वाली आय

  • अन्य जागरूकता से जुड़ी निधि

शामिल होती है।

2017 के नियमों की समीक्षा, नई गाइडलाइंस जल्द

गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि:

  • 2017 में बने अनऑथराइज्ड इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन फ्रेमवर्क की समीक्षा की जा रही है

  • डिजिटल भुगतान में तेजी को देखते हुए नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस जल्द जारी होंगी

  • इन पर पब्लिक कंसल्टेशन भी लिया जाएगा

यह रूपरेखा ग्राहक संरक्षण, मिस-सेलिंग और रिकवरी एजेंट्स के दुरुपयोग से जुड़े नियमों के साथ जोड़ी जाएगी।

डिजिटल भुगतान में भरोसा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम:

  • छोटे फ्रॉड पीड़ितों को त्वरित राहत देगा

  • डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में विश्वास बढ़ाएगा

  • साइबर फ्रॉड से निपटने में ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करेगा

डिजिटल इंडिया के दौर में यह फैसला आम ग्राहकों के लिए एक बड़ी सुरक्षा ढाल के रूप में देखा जा रहा है।

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