विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026’ देशभर में तीव्र विवाद का कारण बन गए हैं। उत्तराखंड में हिंदू छात्र परिषद ने इन नियमों को सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए “काला कानून” बताते हुए इसके खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
“यह सामान्य वर्ग के साथ अन्याय” – हिंदू छात्र परिषद
हिंदू छात्र परिषद का आरोप है कि यह विनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं। परिषद के प्रवक्ता ने कहा कि यह नियम समानता लाने के बजाय विभाजन, असंतोष और भय की स्थिति पैदा करेंगे।
“यह विनियम सामान्य वर्ग के छात्रों को मानसिक रूप से असुरक्षित करने का माध्यम बन सकता है और शिक्षा में निष्पक्षता को कमजोर करता है,” परिषद ने कहा।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर खतरे का आरोप
परिषद का यह भी कहना है कि नए नियमों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, मेरिट और अकादमिक स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से इन विनियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
UGC का पक्ष: नियम क्यों लाए गए?
UGC के अनुसार, ये नियम 2012 के भेदभाव-रोधी दिशानिर्देशों का अद्यतन रूप हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप हैं।
UGC का दावा है कि हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा संस्थानों में SC/ST/OBC और अन्य वंचित वर्गों की शिकायतों में वृद्धि को देखते हुए यह कदम जरूरी था।
‘समता संवर्धन विनियम 2026’ के प्रमुख प्रावधान
UGC द्वारा जारी नियमों में शामिल हैं:
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हर संस्थान में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) अनिवार्य
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समता समिति का गठन
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SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व
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24×7 समता हेल्पलाइन
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भेदभाव शिकायतों पर समयबद्ध जांच
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अपील की व्यवस्था (लोकपाल तक)
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गैर-अनुपालन पर जुर्माना, ग्रांट रोकना या मान्यता रद्द
विरोध का मुख्य कारण क्या है?
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि:
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समता समिति में सामान्य वर्ग का अनिवार्य प्रतिनिधित्व नहीं
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झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंड का स्पष्ट प्रावधान नहीं
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इससे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन की आशंका
इसी आधार पर कई संगठनों और व्यक्तियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दायर की हैं।
देशभर में प्रदर्शन, राजनीति भी गरमाई
दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं।
कुछ स्थानों पर भाजपा से जुड़े नेताओं के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई हैं। वहीं, ABVP जैसे संगठन नियमों के उद्देश्य का समर्थन करते हुए स्पष्टता और संतुलन की मांग कर रहे हैं।
समर्थक और विरोधी – दोनों की दलीलें
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समर्थक वर्ग इसे सामाजिक न्याय और समावेशन की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है
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विरोधी वर्ग इसे संवैधानिक समानता और मेरिट के खिलाफ मान रहा है
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और यह शिक्षा से आगे बढ़कर सामाजिक समरसता और अधिकारों की बहस बन चुका है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दिए जाने के बाद अब सभी की नजरें न्यायिक प्रक्रिया और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
यह साफ है कि UGC समता विनियम 2026 आने वाले समय में शिक्षा नीति और छात्र राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बने रहेंगे।








