राजस्थान के जोधपुर से सनातन धर्म प्रचार से जुड़ी प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया है। 28 जनवरी 2026 को शाम करीब 5:30 बजे उन्हें आश्रम से गंभीर हालत में जोधपुर के प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मौत के करीब चार घंटे बाद, रात 9:28 बजे, उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट (@sadhvi_prembaisa) से एक लंबी पोस्ट सामने आई, जिसे लोग कथित सुसाइड नोट मान रहे हैं।
कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा?
पोस्ट में साध्वी ने लिखा –
“मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा… मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा।”
पोस्ट में सनातन धर्म के प्रति आस्था, ईश्वर और संतों पर भरोसा, तथा “अग्नि परीक्षा” जैसे शब्दों का जिक्र किया गया है। इसमें ब्लैकमेलिंग, मानसिक प्रताड़ना और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के संकेत भी दिए गए हैं।
वायरल वीडियो और ब्लैकमेल का विवाद
साध्वी प्रेम बाईसा पिछले साल एक कथित AI-जनरेटेड वीडियो को लेकर विवादों में आई थीं। उन्होंने दावा किया था कि वीडियो फर्जी है और उन्हें बदनाम करने के लिए वायरल किया गया। इस मामले में उन्होंने ब्लैकमेलिंग की शिकायत भी दर्ज कराई थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार ट्रोलिंग, मानसिक उत्पीड़न और चरित्र हनन का सामना करना पड़ा।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम
एसीपी (वेस्ट) छवि शर्मा के अनुसार, साध्वी को बुखार था और आश्रम में एक कंपाउंडर से इंजेक्शन लगवाया गया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित किया गया।
शव को महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया और 29 जनवरी को पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मौत के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट किसने और किस डिवाइस से की।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश है। लोग इसे “मानसिक प्रताड़ना का नतीजा” बता रहे हैं। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल समेत कई नेताओं और संत समाज ने हाई-लेवल जांच की मांग की है।
कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा?
साध्वी प्रेम बाईसा बाड़मेर जिले के परेऊ गांव की निवासी थीं और बचपन से वैराग्य जीवन जी रही थीं। वे श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार करती थीं और देशभर में बड़ी संख्या में उनके अनुयायी थे।
उनकी मौत ने न सिर्फ धार्मिक समाज को झकझोर दिया है, बल्कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग, साइबर ब्लैकमेल और डिजिटल सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।









