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टेक्सेला और जीआरडी ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष सरदार राजा सिंह ओबराय का निधन, दूनवासियों के दिलों में उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

BPC News National Desk
6 Min Read

भारत के प्रतिष्ठित टेलीविजन ब्रांड टेक्सला टीवी के संस्थापक और प्रसिद्ध उद्योगपति सरदार राजा सिंह ओबराय का 28 फरवरी 2026 को लुधियाना में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और शिक्षा क्षेत्र को एक बड़ी क्षति हुई है।

एक साधारण शरणार्थी बच्चे से लेकर भारत के सबसे प्रभावशाली इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं में से एक बनने तक की उनकी यात्रा संघर्ष, दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता की प्रेरक कहानी है।

1980 और 1990 के दशक में केबल टेलीविजन के तेजी से बढ़ते दौर में टेक्सला भारत के सबसे लोकप्रिय टेलीविजन ब्रांडों में से एक बन गया था। कंपनी के किफायती टीवी सेटों ने देशभर के मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए टेलीविजन को सुलभ बनाया।

बचपन और शुरुआती संघर्ष

Sardar Raja Singh Oberai का जन्म 19 फरवरी 1936 को रावलपिंडी के पास मीरपुर के हिलन गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में स्थित है।

उनका बचपन भारत के विभाजन की त्रासदी से गहराई से प्रभावित हुआ। जब 1947 में देश का बंटवारा हुआ, तब उनका परिवार शरणार्थी के रूप में भारत आ गया। उस समय उनकी उम्र केवल 11 वर्ष थी।

दिल्ली में बसने के बाद उन्हें जीवन की शुरुआत बेहद कठिन परिस्थितियों में करनी पड़ी। उन्होंने एक सब्ज़ी विक्रेता के यहां मजदूर के रूप में काम करना शुरू किया।

औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद उनमें व्यवसाय के प्रति गहरी समझ और मजबूत उद्यमशीलता की भावना थी।

ज्यूपिटर रेडियोज़ से शुरुआत

1961 में उन्होंने अपना पहला व्यवसाय शुरू किया और ज्यूपिटर रेडियोज़ नामक कंपनी की स्थापना की।

यह कंपनी किफायती रेडियो और ट्रांजिस्टर सेट बनाती थी, जो उस समय आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे।

कुछ ही वर्षों में कंपनी का उत्पादन तेजी से बढ़ा और हर साल लगभग 1.5 लाख रेडियो सेट बनने लगे।

ज्यूपिटर रेडियोज़ की सफलता ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

टेक्सला टीवी का उदय

1972 में उन्होंने टेलीविजन उद्योग में कदम रखते हुए टेक्सला टीवी ब्रांड की शुरुआत की।

शुरुआत में कंपनी ने अपने पहले साल में केवल 2,500 टेलीविजन सेट बनाए। लेकिन समय के साथ यह ब्रांड तेजी से लोकप्रिय होता गया।

1980 के दशक तक टेक्सला भारत के प्रमुख टीवी ब्रांडों में शामिल हो चुका था।

1988–89 तक कंपनी हर साल लगभग:

  • 3 लाख ब्लैक एंड व्हाइट टीवी

  • कलर टेलीविजन सेट

का उत्पादन कर रही थी।

उनके बेटे Inderjit Singh Oberai के अनुसार 1980 के दशक के अंत से लेकर 2000 के दशक की शुरुआत तक पंजाब के टेलीविजन बाजार में टेक्सला का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा था।

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का विस्तार

व्यवसाय को मजबूत बनाने के लिए Sardar Raja Singh Oberai ने कई संबंधित उद्योग भी स्थापित किए।

1979 में उन्होंने दिल्ली में राजकमल इंडस्ट्रीज की स्थापना की, जो टेलीविजन के लकड़ी के कैबिनेट बनाती थी।

इसके बाद कंपनी ने लगातार नई तकनीकों और उत्पादों को बाजार में उतारा।

मुख्य उपलब्धियां:

  • 1982: 50,000 यूनिट वार्षिक क्षमता के साथ रंगीन टीवी लॉन्च

  • 1983: कम लागत वाले पोर्टेबल ब्लैक-एंड-व्हाइट टीवी पेश किए

  • लुधियाना: 2 लाख टीवी सेट वार्षिक क्षमता वाली नई फैक्ट्री

1986 में उन्होंने मुलार्ड ट्यूब्स लिमिटेड की स्थापना की, जो टेलीविजन के लिए पिक्चर ट्यूब बनाती थी।

इसके बाद 1987 में बेस्टाविजन इलेक्ट्रॉनिक्स ने नोएडा में उत्पादन शुरू किया और 1988 में पटना में एक और यूनिट स्थापित की गई।

राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार

1989 में टेक्सला ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की।

उस वर्ष कंपनी ने 3 लाख टेलीविजन सेट का उत्पादन किया, जिसके लिए उसे राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

यह उपलब्धि उस समय भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी गई।

शिक्षा और समाज सेवा में योगदान

व्यवसाय के साथ-साथ Sardar Raja Singh Oberai ने शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने गुरु राम दास एजुकेशनल ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके अंतर्गत कई शैक्षणिक संस्थान संचालित होते हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • GRD Institute of Management and Technology, देहरादून

  • GRD Academy, देहरादून

इन संस्थानों के माध्यम से हजारों छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है।

धार्मिक और सांस्कृतिक पहल

उन्होंने सरब सांझी गुरबानी नामक पहल की शुरुआत भी की।

इस पहल का उद्देश्य:

  • गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का प्रसार

  • ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग

  • धार्मिक प्रकाशन

  • भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन

1984 दंगों के दौरान मानवीय कार्य

1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान भी उन्होंने मानवता का परिचय दिया।

उस समय उन्होंने कई पीड़ित परिवारों को:

  • रोजगार उपलब्ध कराया

  • आर्थिक सहायता दी

  • पुनर्वास में मदद की

उनके इस कार्य को समाज में व्यापक सम्मान मिला।

परिवार और विरासत

आज उनका परिवार विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसाय संचालित कर रहा है।

इनमें शामिल हैं:

  • प्लास्टिक निर्माण (टेक्सला प्लास्टिक्स एंड मेटल्स)

  • रोड सेफ्टी उत्पाद (डार्क आई ब्रांड)

  • हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (निर्वाण लग्जरी होटल)

परिवार आज भी नोएडा में टेलीविजन उत्पादन यूनिट का संचालन करता है।

एक प्रेरणादायक जीवन

Sardar Raja Singh Oberai का जीवन इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच से किसी भी कठिन परिस्थिति को सफलता में बदला जा सकता है।

एक शरणार्थी बच्चे से लेकर भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के अग्रदूत बनने तक उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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