गाजियाबाद के सबसे पॉश और व्यस्त इलाकों में गिने जाने वाले राजनगर एक्सटेंशन (आरडीसी) क्षेत्र में कुछ बॉडी मसाज पार्लरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि इन मसाज पार्लरों की आड़ में अनैतिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये प्रतिष्ठान पुलिस चौकी से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम होते ही इन पार्लरों में गतिविधियां तेज हो जाती हैं और बाहर खड़े लोगों की आवाजाही से माहौल संदिग्ध नजर आता है। कई व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों से पहले “मसाज फीस” के नाम पर 500 से 1500 रुपये तक वसूले जाते हैं और उसके बाद अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश की जाती है, जिससे संदेह और गहरा जाता है।
सूत्रों का दावा है कि कुछ मामलों में इन गतिविधियों के वीडियो और फुटेज भी सामने आए हैं, जिन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाया गया है। बावजूद इसके, कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के निवासी लंबे समय से प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया है।
इस मामले में कविनगर के एसीपी सूर्य बलि मौर्य का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। उनका कहना है कि फिलहाल किसी सक्रिय देह व्यापार गिरोह की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब शिकायतें लगातार मिल रही हैं, तो फिर इन गतिविधियों पर लगाम क्यों नहीं लग रही?
गौरतलब है कि गाजियाबाद में इससे पहले भी स्पा और मसाज सेंटर्स की आड़ में चल रहे अवैध रैकेट का खुलासा हो चुका है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच आरडीसी, इंदिरापुरम, पैसिफिक मॉल समेत कई इलाकों में पुलिस ने छापेमारी कर महिलाओं को रेस्क्यू किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद कुछ इलाकों में ऐसे आरोप बार-बार सामने आना चिंता का विषय बना हुआ है।
स्थानीय व्यापारी और निवासी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इन मसाज पार्लरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई अवैध गतिविधि पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से इलाके की छवि खराब हो रही है और सामाजिक माहौल पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक इस पर ठोस कदम उठाए जाते हैं।










