गाजियाबाद, 9 दिसंबर। शिप्रा कृष्णा विस्ता प्रकरण में AOA गठन से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामले की पूरी सुनवाई 7 जुलाई को समाप्त हो चुकी थी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से AOA सेल अभी तक आदेश जारी नहीं कर पाया है। आदेश के बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबित रहने से निवासियों और शिकायतकर्ताओं में भारी नाराज़गी है।
सुनवाई पूरी, आदेश गायब — AOA सेल पर गंभीर सवाल
सूत्रों के अनुसार, प्रकरण की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत कर दिए थे और आदेश को “आरक्षण” में डाल दिया गया था।
इसके बावजूद—
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5 महीने से आदेश जारी नहीं
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फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही
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कोई आधिकारिक अपडेट उपलब्ध नहीं
निवासियों का आरोप है कि यह “अनुचित देरी” प्रशासनिक प्रक्रिया को जानबूझकर रोकने का संकेत देती है।
IGSR पर शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
आवेदकों ने गुणवत्ता-निस्तारण के लिए IGSR पोर्टल पर भी शिकायत पंजीकृत कराई थी।
इसके बावजूद—
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AOA सेल की निष्क्रियता जस की तस
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किसी अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की
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अपडेट या समयसीमा का कोई संकेत नहीं
यह विभागीय संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हाईकोर्ट अवमानना का भी असर नहीं
सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय की अवमानना का उल्लेख भी विभाग पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाया है।
निवासियों का कहना है कि—
“प्रशासनिक तंत्र न्यायिक मर्यादा की अनदेखी कर रहा है, जो बेहद निराशाजनक है।”
मामला अटकने से निवासियों में बढ़ी बेचैनी
शिप्रा कृष्णा विस्ता के निवासी और RWA/AOA समर्थक लंबे समय से स्पष्ट आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि:
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AOA सेल तुरंत आदेश जारी करे
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देरी के कारणों की उच्च-स्तरीय जांच हो
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जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए
स्थानीय लोगों का कहना है कि AOA गठन से जुड़ी अनिश्चितता सोसायटी के प्रशासनिक कामकाज, मेंटेनेंस, सुरक्षा और पारदर्शिता को प्रभावित कर रही है।
अब निगाहें GDA और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों पर
निवासियों का कहना है कि यह प्रकरण सिर्फ सोसायटी का नहीं बल्कि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता का भी मामला है।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि:
क्या GDA अधिकारी लंबित आदेश जारी करेंगे,
या फिर यह फाइल और लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रहेगी?









