उत्तराखंड के चारधामों में प्रमुख श्री बद्रीनाथ धाम हाल की बर्फबारी के बाद पूरी तरह बर्फ की मोटी सफेद चादर में लिपट गया है। मंदिर परिसर, छतें, रास्ते, पेड़-पौधे और आसपास का पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे यह स्थल एक दिव्य शीतकालीन परिदृश्य में बदल गया है।
तापमान माइनस में, 2–4 फीट तक जमी बर्फ
जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में हुई भारी बर्फबारी के चलते बद्रीनाथ क्षेत्र में तापमान -10 से -15 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। कई इलाकों में 2 से 4 फीट तक बर्फ जमा हो चुकी है, जिससे संपूर्ण धाम क्षेत्र शांत, रहस्यमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर नजर आ रहा है।
तस्वीरों में दिखा प्रकृति और आस्था का संगम
जिला प्रशासन, स्थानीय लोगों और पर्यटकों द्वारा साझा की गई तस्वीरों व वीडियो में बद्रीनाथ मंदिर की बर्फ से ढकी भव्य आकृति श्रद्धालुओं का मन मोह रही है।
भक्तों का कहना है कि यह दृश्य भगवान विष्णु की कृपा का प्रतीक लगता है, जहां हिमालय की गोद में आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
साधु-संत तपस्या और ध्यान में लीन
शीतकाल में कपाट बंद होने के बावजूद बद्रीनाथ धाम में कुछ साधु-संत वर्षभर निवास करते हैं। अत्यधिक ठंड और बर्फ के बीच साधु-संतों का तप और ध्यान बद्रीनाथ की आध्यात्मिक महिमा को और बढ़ा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं मनमोहक तस्वीरें
बर्फ से ढके बद्रीनाथ धाम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। मंदिर की सफेद चादर, बर्फीली चोटियां और शांत वातावरण देखकर लोग “जय बद्री विशाल” के जयकारे लगा रहे हैं और देवभूमि उत्तराखंड की सुंदरता की सराहना कर रहे हैं।
पश्चिमी विक्षोभ का असर, चारधाम क्षेत्र में बर्फबारी
मौसम विभाग के अनुसार यह बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हुई है।
बद्रीनाथ के साथ-साथ केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में भी बर्फ जमी है, लेकिन बद्रीनाथ धाम की तस्वीरें सबसे अधिक सुर्खियां बटोर रही हैं।
यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेने की सलाह
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सलाह दी है कि मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं, क्योंकि बर्फबारी के कारण कई सड़कें बंद हो सकती हैं।
श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुलने की संभावना है, लेकिन तब तक यह बर्फीला दृश्य देवभूमि की सुंदरता को और निखार रहा है।







