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अश्लील रील बनाने के आरोप में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शादाब जकाती गिरफ्तार, कोर्ट से मिली जमानत

BPC News National Desk
3 Min Read

इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शादाब जकाती को गुरुवार देर रात मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि एक वायरल वीडियो में उन्होंने लाइव चैट के दौरान नाबालिग लड़की और महिलाओं से आपत्तिजनक व अशोभनीय टिप्पणी की।

वायरल वीडियो के बाद दर्ज हुई शिकायत

इंचौली थाने के SHO जितेंद्र कुमार त्रिपाठी के अनुसार, स्थानीय निवासी अनीस पुत्र इस्लाम ने थाने में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शादाब जकाती महिलाओं और एक नाबालिग से अनुचित भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे हैं।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शादाब जकाती के खिलाफ:

  • BNS की धारा 296 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत)

  • आईटी एक्ट की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री का प्रसारण)

के तहत मुकदमा दर्ज किया।

BNSS की धारा 170 में गिरफ्तारी

पुलिस ने BNSS की धारा 170 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद शुक्रवार को शादाब जकाती को मेरठ की ACJM कोर्ट में पेश किया गया, जहां लंबी सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत दे दी गई।

माफीनामा और शपथ-पत्र दाखिल

जमानत की शर्त के रूप में शादाब जकाती ने कोर्ट में माफीनामा और एफिडेविट प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने भविष्य में किसी भी प्रकार का आपत्तिजनक या अशोभनीय कंटेंट सोशल मीडिया पर अपलोड न करने का वादा किया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर होने के नाते उन पर समाज के प्रति अतिरिक्त जिम्मेदारी है और मनोरंजन के नाम पर मर्यादा का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दो धड़े बन गए हैं। एक वर्ग गिरफ्तारी को जायज ठहरा रहा है, जबकि दूसरा इसे उनकी लोकप्रियता के खिलाफ साजिश बता रहा है।

POCSO की धाराएं भी जुड़ सकती हैं

पुलिस ने बताया कि जांच अभी जारी है। यदि जांच में वीडियो में नाबालिग की संलिप्तता की पुष्टि होती है तो POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

फिलहाल शादाब जकाती जमानत पर रिहा हैं, लेकिन यह मामला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक स्पष्ट संदेश बनकर उभरा है कि कंटेंट की स्वतंत्रता के नाम पर कानून की सीमाओं का उल्लंघन भारी पड़ सकता है।

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