वित्तीय धोखाधड़ी रोकथाम बैठक 16 दिसंबर 2025 को उत्तराखण्ड सचिवालय, देहरादून में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने की। यह बैठक भारतीय रिजर्व बैंक की राज्य स्तरीय समन्वय समिति की वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित उप-समिति के अंतर्गत आयोजित हुई।
बैठक का उद्देश्य राज्य में बढ़ते वित्तीय और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना रहा।
बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई पर जोर
वित्त सचिव ने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित विभागों, बैंकों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक और पुलिस विभाग को मोबाइल ऐप के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए तकनीकी उपाय विकसित करने के निर्देश दिए।
एसटीएफ के तहत फाइनेंसियल फ्रॉड यूनिट सक्रिय
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में एसटीएफ के अंतर्गत फाइनेंसियल फ्रॉड यूनिट का गठन किया गया है।
वित्त सचिव ने इस यूनिट में साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति और बैंकिंग व वित्तीय संस्थानों से नियमित समन्वय के निर्देश दिए।
पुलिस कमांड सेंटर में संयुक्त साइबर इकाई का प्रस्ताव
साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सुझाव दिया गया कि पुलिस कमांड सेंटर में साइबर क्राइम यूनिट और बैंक प्रतिनिधि संयुक्त रूप से कार्य करें।
इससे धोखाधड़ी के मामलों में धन की शीघ्र रिकवरी और धन निकासी पर तत्काल रोक संभव हो सकेगी।
बैठक में हरियाणा मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया गया कि इससे वैकल्पिक चैनलों के माध्यम से धन अंतरण में उल्लेखनीय कमी आई है।
कंपनियों की सूची सार्वजनिक करने का निर्णय
बैठक में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 281 कंपनियां कार्यरत हैं, जिनका सत्यापन नियामक संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से इन कंपनियों की सूची राज्य और जिला स्तर की सरकारी वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्णय लिया गया।
लोनी अर्बन को-ऑपरेटिव सोसाइटी मामला
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में राज्य में दर्ज 14 एफआईआर को सीबीआई को हस्तांतरित किया गया है।
BUDS Registry पर जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर
अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के तहत केंद्र सरकार द्वारा संचालित BUDS Registry पोर्टल के माध्यम से विनियमित और अविनियमित जमा योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने पर जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
बैठक में संयुक्त सचिव गृह गजेंद्र सिंह, आरबीआई की महाप्रबंधक नीता बेहरामफ्राम, अपर निबंधक सहकारिता ईरा उप्रेती, डीएसपी सीआईडी नीरज सेमवाल, एएसपी एसटीएफ कुश मिश्रा, बैंकिंग सलाहकार नरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य स्तरीय यह बैठक उत्तराखण्ड में वित्तीय और साइबर धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, लिए गए निर्णयों से धोखाधड़ी के मामलों में कमी लाने में सहायता मिलेगी।










