पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के बकाया ऋण की वसूली के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए राम चंद ज्वैलर्स की बंधक संपत्तियों का कब्जा लेकर बैंक को सौंप दिया। यह कार्रवाई लगभग 9 करोड़ रुपये के बकाया ऋण के मामले में की गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में की गई। न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया था कि संबंधित संपत्ति का भौतिक कब्जा लेकर बैंक को सौंपा जाए।
सरफेसी अधिनियम के तहत कार्रवाई
यह पूरी प्रक्रिया सरफेसी अधिनियम, 2002 की धारा 14 के तहत संपन्न की गई, जो बैंकों को बंधक संपत्तियों पर कब्जा लेने का अधिकार देती है।
ऋण का पूरा मामला
PNB के अनुसार, राम चंद ज्वैलर्स ने वर्ष 2016 में करीब 3.95 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इसके बदले नोएडा स्थित भूखंड और गाजियाबाद के चोपला मंदिर क्षेत्र की दो दुकानों को गिरवी रखा गया था।
समय पर भुगतान न होने के कारण वर्ष 2019 में इस खाते को NPA घोषित कर दिया गया। ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
DRT ने भी दिया था बैंक के पक्ष में फैसला
इस मामले में ऋण वसूली अधिकरण (DRT), लखनऊ ने अक्टूबर 2025 में सुनवाई के बाद बैंक के पक्ष में निर्णय दिया था। इसके बावजूद बकायेदारों ने संपत्ति का कब्जा नहीं सौंपा।
प्रशासन ने लिया कब्जा
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद नायब तहसीलदार सदर, गाजियाबाद के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने चोपला मंदिर स्थित दुकानों का कब्जा लेकर PNB को सौंप दिया।
बैंक का बयान
PNB के प्राधिकृत अधिकारी ने कहा कि बैंक का उद्देश्य किसी की संपत्ति जब्त करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और उसकी वसूली सुनिश्चित करना है। बार-बार नोटिस और अवसर देने के बावजूद ऋण न चुकाने पर ऐसी कार्रवाई जरूरी हो जाती है।
डिफॉल्टर्स के लिए सख्त संदेश
यह कार्रवाई उन सभी डिफॉल्टर्स के लिए चेतावनी है, जो बैंक ऋण चुकाने में लापरवाही बरतते हैं। यह भी साफ संकेत है कि बैंक और प्रशासन अब वसूली के मामलों में सख्ती बरत रहे हैं।








