भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क में से एक मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की इकाई मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने एक जटिल इन्सीजनल हर्निया के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है।
त्रिपुरा के अगरतला की 45 वर्षीय महिला मरीज नूपुर सरकार का सफल इलाज आधुनिक मिनिमली इनवेसिव (की-होल) सर्जरी के माध्यम से किया गया।
सीनियर सर्जन डॉ. सुमंत डे की देखरेख में हुई सर्जरी
नूपुर सरकार ने मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी – रोबोटिक, एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक, बैरिएट्रिक और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी विभाग के डॉ. सुमंत डे की देखरेख में लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करवाई।
यह सर्जरी पूरी तरह की-होल तकनीक से की गई।
लिवर डोनेशन के बाद शुरू हुई कठिन यात्रा
नूपुर सरकार की यह यात्रा तीन साल पहले शुरू हुई थी, जब उनके पति को लिवर सिरोसिस का पता चला और उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी।
उस समय एकमात्र उपयुक्त डोनर होने के कारण नूपुर ने अपने पति को जीवनदान देने के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया।
उनके पति अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।
पहले ऑपरेशन की जगह बना जटिल हर्निया
लिवर डोनेशन के बाद नूपुर ने बहुत कम आराम के साथ अपनी पेशेवर और घरेलू जिम्मेदारियां निभाईं।
समय के साथ, पहले हुए ऑपरेशन की जगह पर उन्हें बड़ा और जटिल इन्सीजनल हर्निया हो गया। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती गई और उनके रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगी।
ओपन सर्जरी के डर से तलाशा मिनिमली इनवेसिव विकल्प
एक और बड़ी ओपन सर्जरी के डर के कारण नूपुर ने मिनिमली इनवेसिव इलाज के विकल्प तलाशने शुरू किए।
विशेषज्ञ इलाज के लिए वे अगरतला से कोलकाता पहुंचीं और मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास में परामर्श लिया।
विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि जटिलता के बावजूद हर्निया का इलाज लैप्रोस्कोपिक तकनीक से संभव है।
तीन घंटे चली की-होल सर्जरी, बड़ा चीरा नहीं लगा
दिसंबर की शुरुआत में मरीज की लगभग तीन घंटे तक चलने वाली लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की गई।
यह सर्जरी डॉ. सुमंत डे ने अनुभवी एनेस्थेटिस्ट और कुशल ओटी टीम के सहयोग से पूरी तरह की-होल तकनीक से की।
इससे बड़े चीरे से बचा गया और सर्जिकल ट्रॉमा काफी कम हुआ।
डॉ. सुमंत डे का बयान
इस मामले पर बात करते हुए डॉ. सुमंत डे ने कहा,
“पहले बड़ी पेट की सर्जरी हो चुकी हो और फिर इतना बड़ा इन्सीजनल हर्निया हो जाना तकनीकी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की मदद से हम कम ट्रॉमा के साथ सफल सर्जरी कर पाए।”
उन्होंने बताया कि एनेस्थीसिया से जागने के बाद मरीज का पहला सवाल था, “क्या यह लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से हुआ है?”
यह एक सर्जन के लिए सबसे बड़ी संतुष्टि होती है।
चार घंटे में चलने लगीं, अगले दिन छुट्टी
सर्जरी के बाद नूपुर की रिकवरी बहुत सहज और लगभग बिना दर्द के रही।
वे चार घंटे के भीतर चलने लगीं और अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पंद्रह दिन बाद फॉलो-अप में वे पूरी तरह स्वस्थ पाई गईं।
मरीज नूपुर सरकार ने जताया आभार
अपना अनुभव साझा करते हुए नूपुर सरकार ने कहा,
“मैं एक और सर्जरी से बहुत डर रही थी। लेकिन मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास में डॉक्टरों ने मुझे भरोसा दिया। यह जानकर बहुत राहत मिली कि मेरी सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तरीके से हुई है।”
उन्होंने डॉ. सुमंत डे और पूरी टीम का धन्यवाद किया।
उन्नत सर्जरी की प्रभावशीलता का उदाहरण
यह मामला दिखाता है कि उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी जटिल पेट संबंधी बीमारियों में भी कितनी प्रभावी है।
साथ ही, यह मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास की रोगी-केंद्रित और उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।










