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गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या: मोबाइल गेमिंग लत, आर्थिक तंगी और डिजिटल दुनिया का खौफनाक सच

BPC News National Desk
5 Min Read

गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में हुई तीन सगी बहनों की आत्महत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला केवल एक दुखद मौत की कहानी नहीं, बल्कि मोबाइल गेमिंग लत, डिजिटल अकेलापन, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक आर्थिक संकट की गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है।

घटना का पूरा विवरण

भारत सिटी सोसाइटी के बी-1 टावर में रहने वाली

  • 16 वर्षीय निशिका

  • 14 वर्षीय प्राची

  • 12 वर्षीय पाखी

ने 3–4 फरवरी 2026 की रात लगभग 2 बजे, नौवीं मंज़िल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।

तेज़ आवाज़ सुनकर जब सोसाइटी के लोग नीचे पहुंचे, तब तीनों बहनें गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिलीं। अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि तीनों बहनें ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल कंटेंट की गंभीर लत का शिकार थीं।

🔴 कोरियन गेम और वर्चुअल रिलेशनशिप का असर

  • तीनों बहनें कोरियन कल्चर, K-Drama और टास्क-बेस्ड ऑनलाइन गेम से अत्यधिक जुड़ी हुई थीं

  • इस गेम को अनौपचारिक रूप से “कोरियन लवर गेम” या “कोरियन लव गेम” कहा जा रहा है

  • गेम में भावनात्मक जुड़ाव, वर्चुअल रिलेशनशिप और मानसिक दबाव वाले टास्क शामिल बताए जा रहे हैं

कुछ रिपोर्ट्स में इसे ब्लू व्हेल गेम जैसी खतरनाक चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस इसकी आधिकारिक पुष्टि कर रही है।

सोशल मीडिया पहचान और मानसिक अकेलापन

तीनों बहनों ने सोशल मीडिया पर अपने असली नाम बदलकर
एलिजा, सिंडी और मारिया जैसे नाम रख लिए थे।

  • उनके अकाउंट्स पर अच्छी संख्या में फॉलोअर्स थे

  • वे घंटों कोरियन कंटेंट में व्यस्त रहती थीं

  • कमरे की दीवारों पर लिखा मिला: “I am very alone”

एक डायरी में परिवार से दूरी और डिजिटल दुनिया में खो जाने की बात साफ-साफ दर्ज थी।

पिता द्वारा मोबाइल छीने जाने के बाद बढ़ा तनाव

पिता चेतन कुमार को लगभग 10 दिन पहले इन सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी मिली।
उन्होंने:

  • बेटियों के मोबाइल फोन छीन लिए

  • सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट कर दिए

इसके बाद तीनों बहनें गहरे डिप्रेशन और मानसिक तनाव में चली गईं।

आर्थिक बदहाली और पारिवारिक दबाव

  • पिता शेयर ट्रेडिंग से जुड़े थे

  • करीब 2 करोड़ रुपये का कर्ज बताया जा रहा है

  • हालात इतने खराब थे कि बेटियों के मोबाइल बेचकर
    सिर्फ 800 रुपये का बिजली प्रीपेड रिचार्ज कराया गया

पिछले 2–3 वर्षों से तीनों बहनें स्कूल भी नहीं जा रही थीं, जिससे उनका सामाजिक संपर्क लगभग खत्म हो चुका था।

सुसाइड नोट ने सबको झकझोर दिया

पुलिस को मिले सुसाइड नोट में लिखा था:

“मम्मी-पापा सॉरी… हम गेम नहीं छोड़ पाएंगे”

यह पंक्तियां साफ दर्शाती हैं कि मोबाइल गेमिंग की लत किस हद तक मानसिक नियंत्रण बना चुकी थी।

महिला आयोग की सख्त प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया।

उनके प्रमुख सुझाव:

  • कक्षा 5 तक बच्चों को मोबाइल पर होमवर्क न भेजा जाए

  • मोबाइल गेमिंग को मानसिक रूप से घातक बताया

  • डिजिटल अनुशासन और पैरेंटल निगरानी पर ज़ोर

सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है।

समाज के लिए कड़वा लेकिन ज़रूरी सबक

यह घटना हमें कई अहम सवालों के सामने खड़ा करती है:

  • क्या हम बच्चों की ऑनलाइन ज़िंदगी को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं?

  • क्या आर्थिक तंगी में भावनात्मक समर्थन देना भूल जाते हैं?

  • क्या मोबाइल बच्चों का दोस्त बनता जा रहा है और परिवार पीछे छूट रहा है?

डिजिटल लत + मानसिक अकेलापन + पारिवारिक दबाव
= एक बेहद खतरनाक संयोजन

निष्कर्ष

तीन मासूम बहनों की मौत हमें याद दिलाती है कि

बच्चों को मोबाइल से ज्यादा परिवार, संवाद और सुरक्षा की जरूरत है।

कानून-व्यवस्था, शिक्षा विभाग, माता-पिता और समाज—सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल दुनिया बच्चों की ज़िंदगी न निगल जाए।

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