भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक और बड़ा झटका लगा है। फरवरी 2026 की शुरुआत में नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान लैंडिंग करते समय तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस घटना के बाद भारतीय वायुसेना ने पूरे तेजस बेड़े की व्यापक तकनीकी जांच शुरू कर दी है और एहतियात के तौर पर सभी ऑपरेशनल विमानों को अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया गया है।
दुर्घटना कैसे हुई
मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार:
-
घटना फरवरी के पहले सप्ताह (संभावित 7 फरवरी) में हुई
-
विमान नियमित प्रशिक्षण सॉर्टी पूरी कर रहा था
-
लैंडिंग के समय संदिग्ध ब्रेक फेलियर या सिस्टम खराबी हुई
-
विमान रनवे से बाहर निकलकर खाई में गिर गया
इस हादसे में विमान का एयरफ्रेम गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे इसके पूरी तरह सर्विस से बाहर होने की संभावना है।
पायलट सुरक्षित बचा
इस दुर्घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि पायलट ने समय रहते सुरक्षित इजेक्ट कर लिया।
-
पायलट को गंभीर चोट नहीं आई
-
कुछ रिपोर्ट्स में मामूली चोटों का जिक्र
-
जांच के लिए विशेष टीम गठित
हालांकि इस घटना पर अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
तेजस दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड
यह तेजस कार्यक्रम के इतिहास में तीसरी बड़ी दुर्घटना है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं।
1️⃣ मार्च 2024 – राजस्थान हादसा
-
जैसलमेर के पास क्रैश
-
इंजन सीजियर और ऑयल पंप खराबी कारण
-
पायलट सुरक्षित
2️⃣ नवंबर 2025 – दुबई एयरशो हादसा
-
एरोबैटिक डिस्प्ले के दौरान दुर्घटना
-
हाई-जी मैन्यूवर में नियंत्रण खोया
-
पायलट की मौत
3️⃣ फरवरी 2026 – नवीनतम दुर्घटना
-
लैंडिंग के दौरान रनवे से बाहर
-
संभावित ब्रेक या सिस्टम फेलियर
तेजस बेड़े पर प्रभाव
फिलहाल तेजस बेड़े में:
-
लगभग 30–32 Mk1 विमान
-
ट्रेनर वेरिएंट भी शामिल
-
Mk1A डिलीवरी पहले से ही देरी में
निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने हाल ही में पांच नए Mk1A तैयार होने की पुष्टि की थी, लेकिन अब इंडक्शन में और देरी की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
-
शुरुआती चरण में फाइटर जेट हादसे असामान्य नहीं
-
लेकिन लगातार तीन दुर्घटनाएं चिंता का विषय
-
रखरखाव, ट्रेनिंग और तकनीकी विश्वसनीयता की गहन जांच जरूरी
आत्मनिर्भरता के लिए अहम परियोजना
तेजस भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं बल्कि:
-
स्वदेशी तकनीकी क्षमता का प्रतीक
-
भविष्य के Mk1A और Mk2 कार्यक्रम की नींव
-
एयरफोर्स के आधुनिकीकरण का प्रमुख हिस्सा
आगे क्या होगा
वायुसेना द्वारा शुरू की गई जांच में:
-
पूरे बेड़े की तकनीकी समीक्षा
-
संभावित डिजाइन या सिस्टम खामियों की जांच
-
सुरक्षा सुधारों की सिफारिश
उम्मीद है कि जांच से मिले सबक भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेंगे।
निष्कर्ष
लगातार तीसरी दुर्घटना ने तेजस कार्यक्रम पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी भी उन्नत सैन्य विमान विकास कार्यक्रम का सामान्य हिस्सा भी हो सकता है।
जरूरत है मजबूत जांच, पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों की ताकि भारत का यह महत्वाकांक्षी स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम और मजबूत बन सके।







