गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का खतरा अब जानलेवा स्तर पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जिले में कुल 1,38,557 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्शाता है और शहरवासियों में गहरा डर पैदा कर रहा है। औसतन हर महीने 10 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
1,380 गंभीर मामले, बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में से करीब 1,380 केस गंभीर प्रकृति के थे, जहां गहरे घाव और रेबीज का खतरा अधिक था।
विशेष रूप से
-
बच्चे,
-
बुजुर्ग,
-
और महिलाएं
इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
गली-मोहल्लों, पार्कों, स्कूलों के आसपास और आवासीय कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड घूमते नजर आ रहे हैं, जिससे लोग घर से बाहर निकलने में भी हिचकिचा रहे हैं।
170 वैक्सीनेशन केंद्र, फिर भी डर कायम
प्रशासन ने समस्या से निपटने के लिए 170 वैक्सीनेशन केंद्र स्थापित किए हैं, जहां एंटी-रेबीज वैक्सीन और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके बावजूद लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
48 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते, नसबंदी की रफ्तार धीमी
नगर निगम और जिला प्रशासन ABC (Animal Birth Control) नसबंदी अभियान और शेल्टर होम बनाने के दावे तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
अनुमान के अनुसार, गाजियाबाद में 48,000 से अधिक आवारा कुत्ते हैं, जबकि:
-
शेल्टर की क्षमता सीमित है,
-
और नसबंदी अभियान की गति काफी धीमी।
सुप्रीम कोर्ट भी जता चुका है चिंता
यह समस्या केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में भी स्थिति चिंताजनक है।
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़कर शेल्टर में रखने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने 2024 में देशभर में 37.15 लाख डॉग बाइट मामलों का हवाला देते हुए रेबीज के खतरे पर गंभीर चिंता जताई थी।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या सबसे अधिक है।
गाजियाबाद जैसे घनी आबादी वाले शहरों में स्थिति और भी विकट हो जाती है।
रात में बाहर निकलने से डर रहे लोग
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं कि:
-
बच्चे स्कूल जाते समय डरते हैं,
-
बुजुर्ग मॉर्निंग वॉक से कतराते हैं,
-
और कई इलाकों में लोग रात में बाहर निकलने से डरते हैं।
रेबीज घातक बीमारी, समय पर इलाज जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक घातक बीमारी है, जो समय पर वैक्सीन न मिलने पर मौत का कारण बन सकती है।
डॉग बाइट के तुरंत बाद:
-
घाव को साबुन-पानी से धोना,
-
और जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाना
बेहद जरूरी है।
नगर निगम का आश्वासन, लेकिन लोग असंतुष्ट
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि:
-
नसबंदी अभियान तेज किया जाएगा,
-
अधिक शेल्टर बनाए जाएंगे,
-
और वैक्सीनेशन ड्राइव को बढ़ाया जाएगा।
लेकिन बढ़ते आंकड़ों को देखकर लोग मांग कर रहे हैं कि तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं, जैसे:
-
बड़े पैमाने पर कुत्तों को पकड़ना,
-
युद्धस्तर पर नसबंदी,
-
और स्थायी शेल्टर व्यवस्था।
शहर की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों खतरे में
यह स्थिति न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि शहर की सुरक्षा, आवागमन और रहन-सहन पर भी गहरा असर डाल रही है।
प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि गाजियाबाद के लोग बिना डर के जीवन जी सकें।










