आज का दिन भारतीय इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। ठीक 24 वर्ष पहले, 13 दिसंबर 2001 को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों ने भारतीय संसद भवन पर घातक हमला किया था। यह हमला सीधे-सीधे देश के लोकतंत्र के मंदिर पर किया गया था।
दोपहर लगभग 11:30 बजे, संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था। सांसद, मंत्री और कई गणमान्य व्यक्ति परिसर में मौजूद थे। तभी संसद का फर्जी स्टिकर लगी एक सफेद एम्बेसडर कार संसद परिसर में घुस आई। आतंकियों ने भारी हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड फेंकना शुरू कर दिया।
30 मिनट में खत्म हुआ आतंक
दिल्ली पुलिस, संसद सुरक्षा कर्मी और सीआरपीएफ के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आतंकियों को घेर लिया। करीब 30 मिनट की मुठभेड़ में सभी पांचों आतंकवादी मार गिराए गए, जिससे एक बड़े नरसंहार को टाल दिया गया।
इन वीरों ने दी सर्वोच्च आहुति
इस हमले में कुल 9 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए—
दिल्ली पुलिस के जवान:
सब-इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद, हेड कांस्टेबल विजय सिंह, कांस्टेबल नानक चंद, रामपाल और घनश्याम
संसद सुरक्षा सेवा:
कमला रानी, मतबर सिंह
संसद कर्मी:
माली जगदीश यादव
सुरक्षा गार्ड:
जयप्रकाश
इन वीरों के बलिदान ने संसद, लोकतंत्र और देश की आन-बान-शान की रक्षा की।
देश की सुरक्षा नीति में बड़ा मोड़
यह हमला 9/11 के ठीक तीन महीने बाद हुआ था, जिसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में भारी तनाव आया और ऑपरेशन पराक्रम शुरू किया गया। इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु था, जिसे वर्ष 2013 में फांसी दी गई।
हर साल श्रद्धांजलि
हर वर्ष 13 दिसंबर को संसद परिसर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और सांसद पुष्पांजलि अर्पित कर वीरों को नमन करते हैं।
आज भी पूरा देश उन शहीदों को याद कर रहा है, जिनकी बदौलत भारत का लोकतंत्र सुरक्षित है।
जय हिंद! वीरों को कोटि-कोटि प्रणाम।










