आज दोपहर ठीक 2:47 बजे वैदिक मंत्रोच्चार, शंख-घंटियों की गूंज और “जय बद्रीविशाल” के जयघोष के बीच विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए। अब अगले छह माह तक भगवान बद्रीविशाल जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर में शीतकालीन प्रवास के लिए विराजमान रहेंगे।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। कपाट बंद होने की अंतिम घड़ियों में हजारों भक्तों ने भगवान के दर्शन किए और भाव-विभोर होकर उन्हें विदाई दी। सेना के गढ़वाल स्काउट बैंड की मधुर धुनों ने पूरे धाम को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
कपाट बंद होने की मुख्य क्रियाएं
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सुबह 4 बजे मंदिर में अभिषेक पूजा
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भगवान की मूर्ति पर घी का विशेष लेप
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दोपहर 2:47 बजे तेल कलश के साथ कपाट बंद
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उत्सव मूर्ति (उद्धव जी) को पांडुकेश्वर योगध्यान बद्री मंदिर ले जाया गया
यह सम्पूर्ण प्रक्रिया मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल की अगुवाई में विधिवत संपन्न हुई।

कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष अजय कुमार, उपाध्यक्ष किशोर पंवार, जिलाधिकारी चमोली हिमांशु खुराना, पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मंदिर समिति ने जानकारी दी कि श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट अब वर्ष 2026 में वैशाख माह में पुनः खोले जाएंगे। इसकी तिथि विजय पंचांग के अनुसार अप्रैल-मई 2026 के दौरान घोषित की जाएगी।










