नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब लड़ाई केवल जमीन तक सीमित नहीं रही, बल्कि हवा और आकाश में निर्णायक भूमिका निभा रही है। चीन अपने fifth-generation J-20 स्टेल्थ फाइटर के बेड़े का तेजी से विस्तार कर रहा है और उन्नत ड्रोन तकनीक में भारी निवेश कर रहा है।
इसी चुनौती का जवाब देने के लिए DRDO एक गेम-चेंजर तकनीक विकसित कर रहा है – स्टेल्थ मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV), जिसे ‘घातक’ नाम दिया गया है।
‘घातक’ क्या है और क्यों खास?
‘घातक’ एक स्वदेशी स्टेल्थ UCAV है, जिसका अर्थ ही ‘जानलेवा’ होता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह भविष्य में भारतीय वायु सेना की हवाई रणनीति का अहम हिस्सा बनने वाला है।
यह 13 टन वर्ग का UCAV फ्लाइंग-विंग डिजाइन पर आधारित है, जिसमें पारंपरिक फ्यूजलाज और टेल नहीं होते। इसका डिजाइन इसे रडार से लगभग अदृश्य बनाता है।
घातक की प्रमुख खासियतें
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स्टेल्थ क्षमता: दुश्मन के रडार से बचते हुए गहराई तक हमला करने की क्षमता
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स्वायत्त ऑपरेशन: बिना पायलट के मिशन पूरा करने की क्षमता
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हथियार क्षमता: आंतरिक बे में मिसाइल, बम और प्रिसीजन गाइडेड मुनिशन
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एडवांस मटेरियल: 80-90% कंपोजिट (कार्बन फाइबर) से बना हल्का और मजबूत ढांचा
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इंजन: कावेरी इंजन या उसके उन्नत वेरिएंट से संचालित
यह UCAV डीप स्ट्राइक, SEAD (एयर डिफेंस को निष्क्रिय करना) और सटीक हमलों के लिए तैयार किया जा रहा है।
60 UCAV खरीदने की सिफारिश
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 60 ‘घातक’ UCAV खरीदने की सिफारिश की है। अब यह प्रस्ताव डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
चीन के J-20 और ड्रोन बेड़े को जवाब
चीन के J-20 और उसके उन्नत ड्रोन नेटवर्क के सामने भारत को भी मजबूत हवाई शक्ति की जरूरत है।
‘घातक’ बिना पायलट के जोखिम उठाए दुश्मन के संवेदनशील ठिकानों पर पहला हमला कर सकता है, जिससे बाद में तेजस और राफेल जैसे फाइटर जेट्स सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन कर सकें।
सफल परीक्षण और भविष्य की योजना
DRDO ने इस प्रोजेक्ट के तहत SWiFT (Stealth Wing Flying Testbed) का सफल परीक्षण कर लिया है। यह ‘घातक’ का शुरुआती मॉडल है।
यह पूरा कार्यक्रम भारत के विजन 2047 के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘घातक’ के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की स्वदेशी ताकत में बड़ा इजाफा होगा और यह पड़ोसी देशों को स्पष्ट संदेश देगा कि भारत किसी भी हवाई चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
‘घातक’ का विकास न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम भी है।








