अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवाद को हवा दे दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक AI-जनरेटेड तस्वीर साझा की है, जिसमें वे ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर अमेरिकी झंडा गाड़ते नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में उनके साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी दिखाई दे रहे हैं।
तस्वीर के सामने एक बोर्ड लगा है, जिस पर लिखा है—
“Greenland – US Territory | EST 2026”
(ग्रीनलैंड – अमेरिकी क्षेत्र | स्थापित 2026)
यह पोस्ट 20 जनवरी 2026 की सुबह सामने आई, जिसके बाद डेनमार्क और यूरोप के कई देशों में चिंता और नाराजगी बढ़ गई है।
ट्रंप का दावा: “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी”
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने संकेत दिया कि ग्रीनलैंड भविष्य में अमेरिका के प्रस्तावित “गोल्डन डोम” मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए अहम भूमिका निभा सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर “अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।”
इसी क्रम में ट्रंप ने एक और AI-जनरेटेड तस्वीर भी साझा की, जिसमें ओवल ऑफिस की एक बैठक के दौरान मैप पर ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिकी झंडे से रंगा हुआ दिखाया गया है। इससे पहले वे फ्रांस के राष्ट्रपति के निजी संदेश का स्क्रीनशॉट भी साझा कर चुके हैं, जिसमें ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की मंशा पर सवाल उठाया गया था।
डेनमार्क और यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, वहां इस पोस्ट को लेकर गहरी नाराजगी है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री पहले ही ट्रंप के बयानों पर “रुकने” की अपील कर चुकी हैं।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने दो टूक कहा कि
“ग्रीनलैंड बिकने के लिए नहीं है। सोशल मीडिया पोस्ट से किसी देश का भविष्य तय नहीं होता।”
यूरोपीय संघ के कई देशों ने इस कदम को “उकसावे वाला” बताया है। फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय नेताओं ने इसे सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति करार दिया है। EU के भीतर इसे ट्रांसअटलांटिक रिश्तों के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
ग्रीनलैंड विवाद का बैकग्राउंड
ट्रंप की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2019 में भी उन्होंने ग्रीनलैंड को “खरीदने” का प्रस्ताव दिया था, जिसे डेनमार्क और ग्रीनलैंड प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया था। अब अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने इस मुद्दे को फिर से उठाया है, जिसमें आर्कटिक संसाधन, चीन का बढ़ता प्रभाव और सामरिक सुरक्षा जैसे तर्क दिए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह AI-तस्वीर ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वे सोशल मीडिया, टैरिफ धमकियों और प्रतीकात्मक कदमों के जरिए सहयोगी देशों पर दबाव बनाते हैं। दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले आया यह पोस्ट अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्रीनलैंड मुद्दे को और गर्म कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और NATO पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की पोस्ट न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को चुनौती देती है, बल्कि NATO गठबंधन की एकता पर भी सवाल खड़े करती है। यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का यह कदम केवल राजनीतिक दबाव बनाने का तरीका है या फिर किसी गंभीर रणनीतिक योजना की झलक।
फिलहाल इतना तय है कि ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की AI-जनरेटेड तस्वीर ने अमेरिका-यूरोप संबंधों में नई हलचल पैदा कर दी है।









