अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और सख्त आर्थिक कदम उठाते हुए बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका 25% तक का टैरिफ लगा सकता है। यह घोषणा उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर करते हुए इसे “तत्काल प्रभाव से लागू” बताया है।
ट्रंप का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में भारी संख्या में लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं।
ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ट्रंप का बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में ईरानी प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन करते हुए कहा कि वे “संस्थानों पर कब्जा करें” और हिंसा करने वालों के नाम नोट करें, क्योंकि वे “बड़ी कीमत चुकाएंगे।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें रद्द कर दी हैं और चेतावनी दी है कि “प्रदर्शनकारियों की हत्या रुकने तक मदद रास्ते में है।”
ईरान में क्या हो रहा है?
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। यह बीते कई दशकों के सबसे बड़े और हिंसक प्रदर्शनों में गिने जा रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों और एक्टिविस्ट समूहों जैसे HRANA के अनुसार:
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अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
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कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 2,500 से 2,571 तक बताई जा रही है।
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कुछ स्वतंत्र अनुमान 12,000 तक मौतों का दावा कर रहे हैं।
इन आंकड़ों में प्रदर्शनकारी, सुरक्षा बलों के सदस्य और आम नागरिक सभी शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
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तेहरान के एक मॉर्चरी में सैकड़ों शवों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं।
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ईरानी सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है, जिससे सही जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है।
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यह दमन 2022 के महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों (जिसमें 500+ मौतें हुई थीं) से भी ज्यादा हिंसक बताया जा रहा है।
ये प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई, सख्त धार्मिक नियमों और सरकार के खिलाफ गहरे असंतोष से जुड़े हुए हैं।
25% टैरिफ का क्या मतलब है?
ट्रंप का यह 25% टैरिफ सेकेंडरी टैरिफ की तरह काम करेगा। यानी अगर कोई देश—जैसे चीन, भारत, तुर्की, यूएई आदि—ईरान के साथ व्यापार जारी रखता है, तो अमेरिका उन देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि टैरिफ अमेरिकी आयातकों द्वारा चुकाया जाता है, जिसका असर अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
ट्रंप ने इसे “अंतिम और निर्णायक कदम” बताया है, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर या विस्तृत नियम जारी नहीं हुए हैं।
अमेरिका पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला दो धार वाली तलवार जैसा है।
संभावित असर:
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चीन, भारत और अन्य देशों से आने वाले कपड़े, ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
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पहले से लागू ट्रंप के टैरिफ (जैसे विदेशी कारों पर) के साथ यह नया बोझ अमेरिकी परिवारों की जेब पर भारी पड़ सकता है।
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इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
चीन ने पहले ही जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिससे वैश्विक व्यापार तनाव और बढ़ सकता है।
निष्कर्ष: दबाव या नया आर्थिक युद्ध?
ट्रंप का यह कदम ईरान में जारी हिंसा को रोकने और प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यह एक तरह से आर्थिक युद्ध का नया अध्याय भी है।
ईरान में मौतों का सिलसिला जारी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय गहरी चिंता जता रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है—
क्या यह टैरिफ ईरानी सरकार पर दबाव डालेगा या आम जनता की मुश्किलें और बढ़ाएगा?
आने वाले दिनों में इसकी तस्वीर और साफ होगी, लेकिन फिलहाल ईरान की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजर वहां टिकी है।










