यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने निर्यात को बढ़ावा देने और भारत सरकार के विकसित भारत 2047 विज़न को ध्यान में रखते हुए दो नई निर्यात ऋण कार्यशील पूंजी योजनाओं का शुभारंभ किया है। इन योजनाओं का उद्घाटन देहरादून में किया गया।
नई योजनाओं के नाम हैं:
• यूनियन निर्यात सुगम योजना
• यूनियन निर्यात प्रोत्साहन योजना
इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य निर्यातकों को आसान, किफायती और बिना गारंटी वित्त उपलब्ध कराना है।
यूनियन निर्यात सुगम योजना क्या है
इस योजना के अंतर्गत विनिर्माता निर्यातकर्ताओं को 80 करोड़ रुपये तक का कार्यशील पूंजी निर्यात ऋण दिया जाएगा।
मुख्य विशेषताएं:
• गैर-एमएसएमई निर्यातक भी पात्र
• कोलैटरल या गारंटी की आवश्यकता नहीं
• प्रतिस्पर्धी ब्याज दर
• अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद
हालांकि व्यापारी, मर्चेंट निर्यातक, रत्न-आभूषण, हीरा और लौह अयस्क निर्यातक इस योजना में शामिल नहीं होंगे।
यूनियन निर्यात प्रोत्साहन योजना की खासियत
यह योजना विशेष रूप से सूक्ष्म और लघु निर्यातकों के लिए बनाई गई है।
मुख्य लाभ:
• 10 करोड़ रुपये तक का कोलैटरल फ्री ऋण
• तृतीय पक्ष गारंटी की आवश्यकता नहीं
• MSME निर्यातकों के लिए आसान वित्त
• सभी श्रेणी के निर्यातक शामिल
इस योजना के माध्यम से छोटे निर्यातकों को वित्तीय दबाव से राहत मिलेगी।
ब्याज दर और विदेशी मुद्रा लाभ
दोनों योजनाओं में रुपये और विदेशी मुद्रा में प्रतिस्पर्धात्मक ब्याज दर उपलब्ध हैं। ये दरें बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होंगी और निर्यातकों को बेहतर एक्सचेंज मार्जिन का लाभ मिलेगा।
निर्यातकों के लिए बड़ा सहारा
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया लंबे समय से निर्यातकों और MSME सेक्टर को वित्तीय सहायता प्रदान करता रहा है। बैंक का लक्ष्य कार्यशील पूंजी का दबाव कम करना और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।
वर्तमान में बैंक का निर्यात ऋण में लगभग 10 प्रतिशत मार्केट शेयर है और यह देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में दूसरे स्थान पर है।
भारत के निर्यात सेक्टर को मिलेगा नया बूस्ट
इन योजनाओं से विशेष रूप से छोटे और मध्यम निर्यातकों को लाभ मिलेगा। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।








