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अमेरिकी कांग्रेसमैन रैंडी फाइन के पोस्ट से मचा राजनीतिक तूफान

BPC News National Desk
3 Min Read

फ्लोरिडा से रिपब्लिकन कांग्रेसमैन रैंडी फाइन का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर किया गया एक बयान अमेरिका में बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का कारण बन गया है।

फाइन ने अपने पोस्ट में मुसलमानों की तुलना कुत्तों से करते हुए लिखा कि “कुत्तों और मुसलमानों के बीच चुनाव करना कठिन नहीं है।” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

क्या था पूरा विवादित बयान?

रैंडी फाइन ने X पर लिखा:

“If they force us to choose, the choice between dogs and Muslims is not a difficult one.”

यह पोस्ट न्यूयॉर्क की फिलिस्तीनी-अमेरिकी कार्यकर्ता नेरदीन किस्वानी की एक पोस्ट के जवाब में किया गया था, जिसे बाद में किस्वानी ने व्यंग्यात्मक बताया।

फाइन ने दावा किया कि यह टिप्पणी “मुख्यधारा के मुस्लिम विचारों” को दर्शाती है और उन्होंने इसे राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए और भड़काऊ बना दिया।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस बयान के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी, नागरिक अधिकार संगठनों और मुस्लिम समूहों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

  • हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने फाइन को “इस्लामोफोबिक और घृणास्पद नेता” बताया।
  • Council on American-Islamic Relations (CAIR) ने फाइन के इस्तीफे की मांग की।
  • मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स काउंसिल (MPAC) ने इसे “डी-ह्यूमनाइजेशन और घृणा फैलाने वाला बयान” करार दिया।

डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी है कि यदि रिपब्लिकन नेतृत्व ने कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस में सेंसर प्रस्ताव लाया जाएगा।

गैड्सडेन फ्लैग और प्रतीकों पर विवाद

फाइन ने बाद में कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें पारंपरिक Gadsden Flag की शैली में सांप की जगह कुत्तों को दिखाया गया।
इस कदम को आलोचकों ने धार्मिक समुदाय का मज़ाक उड़ाने और नफरत को और बढ़ावा देने वाला बताया।

रैंडी फाइन का बचाव और बयान

विरोध के बावजूद रैंडी फाइन ने अपने बयान पर कोई माफी नहीं मांगी। उन्होंने कहा:

“यह धार्मिक स्वतंत्रता और अमेरिकी मूल्यों की रक्षा का मुद्दा है, न कि किसी धर्म के खिलाफ।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई धार्मिक मान्यता उनके निजी जीवन में दखल देती है, तो वह उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

अमेरिका में बढ़ता धार्मिक और सांस्कृतिक तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अमेरिका में बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण, इमिग्रेशन बहस और सांस्कृतिक संघर्षों को उजागर करता है।
रैंडी फाइन पहले भी मुस्लिम और फिलिस्तीनी समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणियां कर चुके हैं।

अब आगे क्या?

  • क्या अमेरिकी कांग्रेस रैंडी फाइन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी?
  • या यह विवाद सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित रह जाएगा?

फिलहाल, अमेरिका की राजनीति और समाज दोनों की नजरें इस मुद्दे पर टिकी हुई हैं।

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