उत्तर प्रदेश की बेटी और विश्व प्रसिद्ध ‘वाटर वूमेन ऑफ इंडिया’ शिप्रा पाठक ने एक बार फिर भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया है। ब्रिटेन की संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में अपनी नई पुस्तक “महाकुंभ” का विमोचन कर जब वे स्वदेश लौटीं, तो दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। सैकड़ों लोगों ने फूलमालाएं पहनाकर, तिरंगा झंडे लहराकर और भारत माता की जय के नारों के साथ उनका अभिनंदन किया।

ब्रिटिश संसद के ऐतिहासिक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिप्रा पाठक ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का वैभव पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपना पूरा संबोधन हिंदी भाषा में दिया, जिसे वहां मौजूद सांसदों और विदेशी प्रतिनिधियों ने खड़े होकर तालियों के साथ सराहा।
शिप्रा पाठक ने कहा:
“मैं गर्व से कहती हूं कि मैं सनातनी हूं। प्रयागराज का महाकुंभ विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक सभा है और इसे पूरी दुनिया ने देखा। यह हमारी सनातन संस्कृति की जीत है।”
उनकी पुस्तक “महाकुंभ” प्रयागराज के विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेले की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक महत्ता और धार्मिक चेतना को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती है। ब्रिटिश संसद जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इस पुस्तक का विमोचन होना ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

शिप्रा पाठक ने बताया कि लंदन में मौजूद विदेशी मेहमानों ने उनकी हिंदी में दी गई प्रस्तुति को बेहद सराहा और कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिंदी में ही संवाद भी किया।
जल संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली शिप्रा पाठक को ‘वाटर वूमेन’ की उपाधि प्राप्त है। वे वर्षों से गंगा स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के लिए कार्यरत हैं।
भारत लौटने पर उन्होंने कहा:
“मैं उत्तर प्रदेश की बेटी हूं। यूपी की माटी ने मुझे वह ताकत दी कि मैं लंदन की संसद में तिरंगा फहरा सकूं और हिंदी में पूरी दुनिया के सामने अपनी बात रख सकूं।”
एयरपोर्ट पर स्वागत समारोह में साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की बड़ी उपस्थिति रही। सभी ने एक स्वर में कहा कि शिप्रा पाठक ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत का मान बढ़ाया है।











