देहरादून में Uttarakhand Diploma Engineer Federation की अनिश्चितकालीन हड़ताल को अब व्यापक समर्थन मिलने लगा है। यमुना कॉलोनी में चल रहे इस आंदोलन को Devbhoomi Jal Shakti Contractor Welfare Association ने भी समर्थन देते हुए सरकार से जल्द समाधान की मांग की है।
देहरादून हड़ताल को मिला ठेकेदार संगठन का समर्थन
एसोसिएशन के अध्यक्ष Amit Agarwal हड़ताल स्थल पर पहुंचे और महासंघ के पदाधिकारियों से मुलाकात कर समर्थन जताया। इस दौरान उन्होंने प्रमुख इंजीनियर प्रतिनिधियों से बातचीत की और उनकी मांगों को जायज बताया।
विकास कार्यों पर पड़ रहा असर
Amit Agarwal ने बताया कि 23 मार्च से जारी इस हड़ताल के कारण राज्य के कई महत्वपूर्ण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। खासकर देहरादून Uttarakhand Peyjal Nigam से जुड़े प्रोजेक्ट ठप पड़ गए हैं।
उन्होंने कहा:
- कार्यों का मापन नहीं हो पा रहा
- ठेकेदारों को भुगतान में देरी हो रही
- निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ गई है
27 सूत्रीय मांगों पर सरकार से अपील
इंजीनियर महासंघ की 27 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से जल्द वार्ता की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
चारधाम यात्रा और महाकुंभ पर असर की आशंका
देहरादून हड़ताल का असर आगामी बड़े धार्मिक आयोजनों पर भी पड़ सकता है, जिनमें प्रमुख हैं:
- Char Dham Yatra
- Haridwar Mahakumbh 2027
इन आयोजनों के लिए सड़कों, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करना आवश्यक है।
तकनीकी कार्यों में आ रही बाधाएं
अपर सहायक अभियंताओं की अनुपस्थिति में तकनीकी कार्यों को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे परियोजनाओं में देरी होना तय माना जा रहा है।
सरकार को चेतावनी
Amit Agarwal ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि इंजीनियरों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द वार्ता कर समाधान निकाला जाए।
समर्थन जारी रहने का भरोसा
Devbhoomi Jal Shakti Contractor Welfare Association ने महासंघ को पूर्ण समर्थन देने का भरोसा जताया और कहा कि वे पहले भी इंजीनियरों के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी सहयोग जारी रहेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, Dehradun में इंजीनियरों की यह हड़ताल अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। इसका सीधा असर राज्य के विकास कार्यों और आने वाले महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों पर पड़ सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस चुनौती का समाधान कितनी शीघ्रता से निकालती है।







