Bpc News Digital

  • अपनी भाषा चुनें

You are Visiters no

814702
हमें फॉलो करें

भाषा चुनें

केदारनाथ और बदरीनाथ समेत चारधाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव: उत्तराखंड सरकार और मंदिर समितियां सख्त रुख

BPC News National Desk
4 Min Read

उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने बदरीनाथ, केदारनाथ और समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे आगामी बोर्ड बैठक में पारित किया जाएगा।

इस प्रस्ताव के लागू होने पर उत्तराखंड की धार्मिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

48 मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर रोक का प्रस्ताव

बीकेटीसी अध्यक्ष और भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि:

“बदरीनाथ और केदारनाथ धाम पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित वैदिक परंपराओं के केंद्र हैं।”

उन्होंने कहा कि केदार खंड से मानस खंड तक की मंदिर परंपरा में ऐतिहासिक रूप से गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहा है, लेकिन पूर्व सरकारों में इस परंपरा का उल्लंघन हुआ।

प्रस्ताव में शामिल हैं:

  • कुल 48 मंदिर

  • कुंड

  • धार्मिक स्थल
    जहां गैर-हिंदुओं की एंट्री पर पूर्ण रोक लगाने की तैयारी है।

गंगोत्री में पहले ही लागू हो चुका प्रतिबंध

इससे पहले श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने सर्वसम्मति से:

  • गंगोत्री धाम

  • मुखबा (शीतकालीन निवास)

में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

समिति अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि यह फैसला धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए लिया गया है।

हालांकि यमुनोत्री मंदिर समिति ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

मुख्यमंत्री धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर कहा:

“सरकार मंदिर समितियों की सिफारिशों के अनुसार कार्रवाई करेगी। यह उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का कदम है।”

उन्होंने यह भी संकेत दिए कि:

  • हरिद्वार के 105 गंगा घाटों पर

  • गैर-हिंदुओं के प्रवेश को सीमित करने पर विचार चल रहा है

  • जिसे 2027 के अर्धकुंभ से लागू किया जा सकता है

राजनीतिक विवाद और प्रतिक्रियाएं

इस प्रस्ताव के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

कांग्रेस का विरोध:

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया:

  • क्या अब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे गैर-हिंदू अधिकारी भी इन धामों में नहीं जा सकेंगे?

  • क्या यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का उल्लंघन नहीं है?

विपक्ष का आरोप:

विपक्ष ने इसे भाजपा का धार्मिक एजेंडा बताया।

मुस्लिम संगठनों की आपत्ति:

कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण करार देते हुए आपत्ति जताई है।

समर्थकों का पक्ष

समर्थकों का कहना है कि:

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26

  • धार्मिक संस्थाओं को अपने आंतरिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है

उदाहरण के तौर पर:

  • जगन्नाथ पुरी मंदिर

  • सबरीमाला

  • कई अन्य प्रमुख मंदिरों में
    पहले से गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।

चारधाम यात्रा पर असर

पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में:

  • कुल श्रद्धालु: 51 लाख+

  • बदरीनाथ: 16.6 लाख

  • केदारनाथ: 17.68 लाख

प्रस्ताव लागू होने पर:

  • अंतरराष्ट्रीय पर्यटक

  • गैर-हिंदू श्रद्धालु
    चारधाम यात्रा से बाहर हो सकते हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन की प्रकृति बदल सकती है।

देवभूमि की धार्मिक पहचान को मजबूत करने की तैयारी

उत्तराखंड सरकार और मंदिर समितियां इस प्रस्ताव को जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य:

  • देवभूमि की धार्मिक पवित्रता

  • वैदिक परंपराओं की रक्षा

  • मंदिरों की मूल पहचान को सुरक्षित रखना

बताया जा रहा है कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यह जानकारी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक बयानों के आधार पर साझा की गई।

Share This Article
bpcnews.in is one of the fastest-growing Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India-based news and stories
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *