उत्तराखंड के राज्यपाल ने गाजियाबाद के वीर चक्र विजेता कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी को किया सम्मानित
उत्तराखंड राजभवन के ऑडिटोरियम में आज “विमर्श” नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय रहा – सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन की संभावनाएँ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने गाजियाबाद निवासी राष्ट्रिय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा वीर चक्र से सम्मानित कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी (से.नि.) को उनकी देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और पूर्व सैनिकों एवं देशभक्त नागरिकों को एकजुट करने के अद्वितीय कार्य के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया।
राज्यपाल महोदय ने अपने संबोधन में कर्नल त्यागी की प्रशंसा करते हुए कहा,
“आज राष्ट्रीय स्तर पर पूर्व सैनिकों और देशभक्त नागरिकों का इससे बेहतर और सक्रिय संगठन दूसरा कोई नहीं है। कर्नल त्यागी की ऊर्जा, समर्पण और इमानदारी अनुकरणीय है।”
इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पूर्व आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल चतुर्वेदी, कीर्ति चक्र एवं शौर्य चक्र विजेता ऋषि बब्बर, पद्म श्री कल्याण सिंह रावत (प्रख्यात पर्यावरणविद्) तथा कमांडर दीपक खंडूरी शामिल रहे।
उत्तराखंड को 21वीं सदी का तीसरा दशक बनाने का आह्वान
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की 350 किलोमीटर से अधिक सीमा तिब्बत और नेपाल से लगती है। इसलिए सीमावर्ती गाँवों को सड़क, संचार और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है। इन गाँवों को पर्यटन के लिए आकर्षक बनाया जा रहा है।
उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया:
मधुमक्खी पालन (Bee-keeping)
सुगंधित पौधों से एरोमा उत्पाद (Aroma Mission)
मोटा अनाज (Millets) की खेती को मुहिम की तरह आगे बढ़ाना
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कथन को दोहराते हुए कहा,
“21वीं शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।”
उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी युवा देशभक्तों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा,
“आप सभी उत्तराखंड के राजदूत हैं।”
चीर के पेड़ों पर गंभीर चिंता
पर्यावरणविद् पद्म श्री कल्याण सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड में आपदाओं का एक बड़ा कारण ब्रिटिश काल में लगाए गए चीड़ के पेड़ हैं। इन पेड़ों की पत्तियाँ मिट्टी को बंजर बनाती हैं और जंगल की आग को भयावह रूप देती हैं। इसके स्थान पर चौड़े पत्तों वाले देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने सभी अतिथियों एवं राज्यपाल महोदय का आभार व्यक्त किया और राष्ट्रिय सैनिक संस्था की ओर से उत्तराखंड के विकास एवं सीमा सुरक्षा में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
यह आयोजन न केवल सैन्य सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए एक नई प्रेरणा भी लेकर आया।










