उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के माननीय कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (CURAJ), जयपुर में आयोजित प्रतिष्ठित व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की।
व्याख्यान का विषय था –
“भारतीय शिक्षा का रूपांतरण: नई शिक्षा नीति 2020 एकीकृत”
(Transformation of Indian Education: Integrated under NEP 2020)
यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष जोर
प्रो. पांडेय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली को सफल बनाने के लिए
प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक विषयों का समन्वय बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा:
“विदेशी विद्वान लंबे समय से भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व शांति का मार्ग मानते हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली को इसी मूल दर्शन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।”
NEP 2020 और संस्कृत का समन्वय
जनवरी 2026 में कुलपति नियुक्त हुए प्रो. रमाकांत पांडेय ने बताया कि
उनकी प्राथमिकता में शामिल हैं:
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संस्कृत और भारतीय दर्शन
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ज्योतिष, कर्मकांड, अनुवाद अध्ययन
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी का उपयोग
उन्होंने कहा कि NEP 2020 भारतीय शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ
भारतीय मूल्यों से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है।
देशभर के शिक्षाविदों की सहभागिता
इस व्याख्यान माला में देशभर से:
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सहायक आचार्य
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सह-आचार्य
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आचार्य
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विषय विशेषज्ञ
ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में
भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System – IKS) को मजबूत करना है।
शिक्षा जगत में प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के व्याख्यान:
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नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं
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आधुनिक शिक्षा को भारतीय दृष्टिकोण देते हैं
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NEP 2020 को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाते हैं
प्रो. पांडेय का यह व्याख्यान
संस्कृत और आधुनिक शिक्षा के बीच सेतु बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।









