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मेरठ में थाने के अंदर वीडियोग्राफी पर CO सौम्या अस्थाना का वायरल ऑडियो

BPC News National Desk
4 Min Read

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में थाने के अंदर वीडियोग्राफी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। ब्रह्मपुरी सर्किल की सर्किल ऑफिसर सौम्या अस्थाना का 29 सेकंड का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल ऑडियो में वे अधीनस्थ थानाध्यक्षों को निर्देश देती सुनाई दे रही हैं कि यदि कोई पत्रकार थाने के अंदर वीडियोग्राफी करता है तो उसके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए।

CO सौम्या अस्थाना के वायरल ऑडियो को लेकर मीडियाकर्मियों में नाराजगी देखी गई और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

वायरल ऑडियो में क्या कहा गया?

वायरल क्लिप में CO सौम्या अस्थाना कहती सुनाई दे रही हैं:
“सभी थाने ध्यान दें। किसी भी थाने के अंदर किसी पत्रकार द्वारा अगर वीडियोग्राफी की जाती है, तत्काल मुकदमा लिखवाएं।”

ऑडियो में टीपी नगर थाने के एक संदर्भ का भी जिक्र बताया जा रहा है। इस क्लिप के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए।

SSP अविनाश पांडेय की सफाई

मामला बढ़ने पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय को सफाई देनी पड़ी। SSP ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश सामान्य या मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए नहीं था।

उन्होंने कहा कि यह आदेश विशेष रूप से उन “पोर्टल संचालकों” या गैर-मान्यता प्राप्त यूट्यूब/ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाने वालों के संदर्भ में था, जो थाने के अंदर अनावश्यक और अनर्गल वीडियोग्राफी कर सरकारी कार्य में बाधा डाल रहे थे।

SSP ने यह भी कहा कि प्रिंट मीडिया या अधिकृत पत्रकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और कार्यवाही उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी 2023 के अनुरूप ही की जाएगी।

टीपी नगर थाना बना विवाद का केंद्र

यह विवाद मुख्य रूप से टीपी नगर थाने से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां एक गैर-मान्यता प्राप्त पोर्टल संचालक द्वारा थाने के भीतर दो पक्षों की निजी बातचीत का वीडियो बनाया जा रहा था। पुलिस का दावा है कि उसी संदर्भ में CO ने यह दिशा-निर्देश जारी किए थे।

पुलिस का यह भी कहना है कि वायरल ऑडियो आंशिक रूप से साझा किया गया है और पूर्ण संदर्भ में यह केवल विशिष्ट परिस्थितियों के लिए था।

पारदर्शिता बनाम गोपनीयता की बहस

मीडियाकर्मियों का कहना है कि थाने सार्वजनिक संस्थान हैं और पारदर्शिता के लिए वीडियोग्राफी आवश्यक है। वहीं पुलिस प्रशासन का तर्क है कि अनियंत्रित रिकॉर्डिंग से गोपनीयता भंग हो सकती है और सरकारी कार्य प्रभावित हो सकता है।

CO सौम्या अस्थाना 2023 बैच की अधिकारी हैं और यह मामला पुलिस व मीडिया के बीच संतुलन और अधिकारों की बहस को फिर से सामने ले आया है।

निष्कर्ष

CO सौम्या अस्थाना वायरल ऑडियो प्रकरण ने मेरठ में प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी है। हालांकि SSP की सफाई के बाद स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस बयानों और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री पर आधारित है। मामले की जांच जारी है।

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