उत्तराखंड में चारधाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) तथा हरिद्वार के 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव लगातार चर्चा में बना हुआ है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और गंगोत्री मंदिर समिति ने इस दिशा में प्रस्ताव पारित कर लिया है, जबकि राज्य सरकार अंतिम निर्णय की तैयारी में है।
इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह, जो सिख समुदाय से हैं, इस प्रस्ताव से प्रभावित होंगे? क्या वे भविष्य में चारधाम यात्रा या हरिद्वार स्नान कर पाएंगे? यह मुद्दा अब धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि:
“चारधाम पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित वैदिक सनातन परंपराओं के केंद्र हैं।”
प्रस्ताव में:
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कुल 48 मंदिर, कुंड और धार्मिक स्थल
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जहां गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक
लगाने की बात कही गई है।
इसी तरह:
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गंगोत्री मंदिर समिति ने
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गंगोत्री धाम
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मुखबा (शीतकालीन निवास)
में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है।
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हरिद्वार के 105 घाटों पर भी ऐसा ही प्रतिबंध लगाने पर विचार चल रहा है, जिसे 2027 के अर्धकुंभ से लागू किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार सभी पक्षों की राय लेकर अंतिम निर्णय करेगी।
कुंभ और चारधाम में गैर-हिंदुओं की बड़ी भागीदारी
हरिद्वार कुंभ और चारधाम यात्रा में हर साल:
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करोड़ों श्रद्धालु
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हजारों विदेशी पर्यटक
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अन्य धर्मों के अनुयायी
शामिल होते हैं।
पिछले साल चारधाम यात्रा में:
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कुल यात्री: 51 लाख+
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विदेशी श्रद्धालु: अनुमानित 1–2 लाख
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिबंध लागू होता है तो:
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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन
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होटल, ट्रैवल, लोकल कारोबार
पर गहरा असर पड़ सकता है।
हालांकि समर्थकों का कहना है कि:
धार्मिक पवित्रता व्यापार से ऊपर है, जैसा कि जगन्नाथ पुरी और सबरीमाला जैसे मंदिरों में पहले से लागू है।
राज्यपाल गुरमीत सिंह पर उठा सवाल
सबसे संवेदनशील सवाल राज्यपाल गुरमीत सिंह को लेकर है, जो सिख हैं।
कांग्रेस ने सवाल उठाया:
“अगर गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन होती है, तो क्या राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदाधिकारी भी प्रभावित होंगे?”
क्योंकि:
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राज्यपाल सिंह पहले बद्रीनाथ और केदारनाथ जा चुके हैं
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वे धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं
BKTC की सफाई: सिखों को मिलेगी छूट
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस पर स्पष्ट किया कि:
“सिख, जैन और बौद्ध समुदायों को हिंदू धर्म के अंतर्गत माना जाएगा।”
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि:
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सिख
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जैन
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बौद्ध
को हिंदू धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
इसलिए:
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राज्यपाल गुरमीत सिंह
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और अन्य सिख श्रद्धालु
पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा:
प्रस्ताव का समर्थन, इसे धार्मिक अस्मिता की रक्षा बताया।
कांग्रेस:
इसे राजनीतिक एजेंडा करार दिया और संवैधानिक सवाल उठाए।
मुस्लिम संगठन:
इसे भेदभावपूर्ण निर्णय बताते हुए विरोध।
पर्यटन विशेषज्ञ:
कहा कि यह फैसला उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।
संविधान का टकराव
यह मामला दो संवैधानिक धाराओं के बीच संतुलन का बन गया है:
अनुच्छेद 26:
धार्मिक संस्थाओं को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार।
अनुच्छेद 15 और 25:
धर्म के आधार पर भेदभाव पर रोक।
इसी टकराव के कारण यह मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट लेवल की बहस तक पहुंच सकता है।
अंतिम फैसला क्या तय करेगा?
अब सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा कि:
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क्या प्रतिबंध सभी गैर-हिंदुओं पर लागू होगा?
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या सिख, जैन, बौद्ध समुदायों को स्थायी छूट मिलेगी?
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क्या हरिद्वार घाटों पर भी यही नियम लागू होंगे?
राज्यपाल गुरमीत सिंह का मामला इस पूरे विवाद का प्रतीक बन गया है, जो धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन की असली परीक्षा है।








