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नौजवानों ने रचा इतिहास: मुकुल सहलोत और सिद्धार्थ त्यागी बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

BPC News National Desk
3 Min Read

गाजियाबाद। जिले के अटौर और भदौली गांव के दो होनहार युवाओं ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अटौर गांव के मुकुल सहलोत और भदौली गांव के सिद्धार्थ त्यागी की इस सफलता ने पूरे इलाके में गर्व और खुशी का माहौल पैदा कर दिया है।

अटौर गांव में भव्य सम्मान समारोह

दोनों युवाओं के सम्मान में अटौर गांव में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों और गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। समारोह का आयोजन हिंदू युवा संगठन भारत के जिला उपाध्यक्ष (गाजियाबाद) विश्वेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस अवसर पर कई प्रमुख लोग मौजूद रहे, जिनमें:

  • ग्राम प्रधान रणवीर सिंह

  • पूर्व प्रधान प्रत्याशी विजय शर्मा

  • श्याम सिंह चौधरी

  • बाबा ब्रह्म सिंह

  • पूर्व प्रधान तेजराम सिंह

  • पूर्व बीडीसी सदस्य संदीप शर्मा

सहित गांव के अनेक सम्मानित नागरिक शामिल रहे।

पारंपरिक तरीके से हुआ सम्मान

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत से हुई। मुकुल सहलोत और सिद्धार्थ त्यागी को मंच पर बुलाकर:

  • पगड़ी बांधी गई

  • फूलों की मालाएं पहनाई गईं

  • बुके भेंट किए गए

  • शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया

ग्रामीणों ने तालियों और नारों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने दोनों अधिकारी

समारोह में उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे युवा देश की असली ताकत हैं, जो कठिन परीक्षाओं को पार कर सेना में शामिल होकर राष्ट्र की सेवा का संकल्प लेते हैं।
मुकुल और सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में बताया कि वे बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते थे, जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर पूरा किया।

परिवार का मिला पूरा सहयोग

दोनों युवाओं की सफलता के पीछे उनके परिवारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:

  • मुकुल सहलोत के पिता संजय सहलोत पूर्व सैनिक हैं और वर्तमान में दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं।

  • सिद्धार्थ त्यागी के पिता शिवकुमार त्यागी एक किसान हैं।

इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि में सेवा, अनुशासन और मेहनत की भावना साफ झलकती है।

अब देश सेवा की जिम्मेदारी

अब दोनों युवा लेफ्टिनेंट के रूप में भारतीय सेना में अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे और देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनकी इस उपलब्धि ने क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया है।

निष्कर्ष

मुकुल सहलोत और सिद्धार्थ त्यागी की सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
गाजियाबाद के ये दोनों युवा आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

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