एससी-एसटी एक्ट के दावों पर हाईकोर्ट सख्त, गाजियाबाद में 15 से अधिक मामले फर्जी पाए गए
गाजियाबाद में 15 मामलों में गलत तथ्यों के आधार पर सहायता लेने का दावा, 8.90 लाख रुपये की रिकवरी अप्रैल 2025 से अब तक 186 मामलों में दो करोड़ से अधिक की सहायता
गाजियाबाद। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) के तहत पीड़ितों को मिलने वाली सहायता और राहत राशि के दावों में कथित अनियमितताओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के साथ-साथ राहत राशि के दावों का गहन भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के निर्देशों के बाद गाजियाबाद में भी ऐसे मामलों की जांच तेज कर दी गई है।
गाजियाबाद में 15 से अधिक मामले जांच में फर्जी मिले
पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान गाजियाबाद में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों और उनके आधार पर दी गई सहायता राशि की जांच में 15 से अधिक मामले कथित तौर पर फर्जी पाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में शिकायतों अथवा दावों में दिए गए तथ्यों की जांच के बाद यह सामने आया कि कुछ मामलों में गलत तथ्यों या झूठी शिकायतों के आधार पर सरकारी सहायता हासिल की गई थी।
जांच के बाद ऐसे मामलों में दी गई सहायता राशि की रिकवरी की कार्रवाई की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 8 लाख 90 हजार रुपये की सहायता राशि वापस ली जा चुकी है। वहीं, अनुचित तरीके से लाभ लेने वाले दावेदारों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी चल रही है।
186 मामलों में दो करोड़ से अधिक की सहायता
समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2025 से अब तक गाजियाबाद जिले में एससी-एसटी एक्ट से संबंधित कुल 186 मामलों में दो करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। यह सहायता निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता के आधार पर पीड़ितों को दिए जाने का प्रावधान है।
अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में वास्तविक पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना सरकार की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में फर्जी दावों की वजह से पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित न हो, इसके लिए सत्यापन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
झांसी के मामले के बाद बढ़ी निगरानी
एससी-एसटी एक्ट के तहत राहत राशि से जुड़े मामलों में झांसी में एक ही परिवार द्वारा अलग-अलग मामलों में लाखों रुपये की सहायता राशि प्राप्त किए जाने की घटना सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने निगरानी और सत्यापन को लेकर सख्त रुख अपनाया। इसी के बाद प्रदेश के जिलों में राहत राशि से जुड़े मामलों की जांच और मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
गाजियाबाद में समाज कल्याण विभाग और संबंधित जिला स्तरीय समितियों ने भी पुराने और नए दावों की जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों की ओर से मामलों में शिकायत, एफआईआर, पीड़ित पक्ष, घटनास्थल और अन्य संबंधित तथ्यों का सत्यापन किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।
वास्तविक पीड़ितों को मिले लाभ, फर्जी दावों पर कार्रवाई
अधिकारियों के मुताबिक, एससी-एसटी एक्ट के तहत राहत व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को आर्थिक सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराना है। इसलिए पात्र लाभार्थियों को सहायता देने के साथ-साथ गलत तरीके से सरकारी धन प्राप्त करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है।
गाजियाबाद में सामने आए मामलों के बाद अब राहत राशि के दावों की जांच और भौतिक सत्यापन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों की निगरानी की जा रही है, जिनमें तथ्यों को लेकर संदेह सामने आता है। अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी सहायता का लाभ सही पात्रों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।







