राज्य में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सचिव ने बैंकों को निर्देश दिए कि वे ऋण-जमा अनुपात को 60 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ कार्य करें। साथ ही स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के तहत लंबित ऋण आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन जनपदों में ऋण-जमा अनुपात अपेक्षाकृत कम है, वहां अग्रणी जिला प्रबंधक विशेष रणनीति बनाकर कार्य करें। विशेष रूप से पर्वतीय जिलों में होटल, पर्यटन और पावर प्रोजेक्ट्स की वित्तीय गतिविधियों को स्थानीय बैंकों से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि जिस जिले में कोई इकाई संचालित हो रही है, उसकी सभी वित्तीय गतिविधियां उसी जिले के बैंक से संचालित होनी चाहिए, जिससे स्थानीय आर्थिक संरचना सुदृढ़ हो सके।
स्वामित्व कार्ड के आधार पर ऋण व्यवस्था पर जोर
बैठक में स्वामित्व कार्ड के माध्यम से ऋण वितरण के लिए बैंकों द्वारा SOP जारी करने पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” अभियान की व्यापक जनजागरूकता के लिए सभी विभागों को जोड़ने के निर्देश भी दिए गए।

ऑनलाइन गवाही के लिए VC सुविधा अनिवार्य
सचिव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 के तहत न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाने हेतु जिला मुख्यालय स्थित बैंक शाखाओं में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) सुविधा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
रोजगार और MSME सेक्टर को प्राथमिकता
रोजगार सृजन योजनाओं में लंबित आवेदनों पर नाराजगी जताते हुए सचिव ने बैंकों से कहा कि वे इन आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण करें।
साथ ही MSME सेक्टर और शिक्षा ऋण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा में पर्याप्त सहयोग मिल सके।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस अवसर पर अपर सचिव रंजना राजगुरु, हिमांशु खुराना, निवेदिता कुकरेती और अभिषेक रुहैला सहित विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।










