ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 14 दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब हिंसक रूप ले चुके हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में 200 से अधिक लोगों की मौत की खबर है।
रिपोर्ट के अनुसार, अकेले तेहरान में ही बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलियां चलाई गईं, जिससे मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
आर्थिक संकट और महंगाई से भड़का गुस्सा
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा
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आर्थिक संकट,
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महंगाई,
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बेरोजगारी,
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और सरकारी नीतियों को लेकर है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं हिजाब कानून में बदलाव और महिला अधिकारों की मांग को लेकर भी सड़कों पर उतरी हैं।
सुरक्षा बलों की सख्ती, सैकड़ों गिरफ्तार
सरकारी कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं और सैकड़ों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आ रही हैं। कई शहरों में हालात काबू से बाहर होते देख सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनात किया गया है।
खामेनेई का आरोप – अमेरिका के इशारे पर हो रहे प्रदर्शन
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दिया है। उन्होंने एक बयान में साफ कहा कि इसके पीछे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का हाथ है।
खामेनेई ने कहा कि
“अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इस्लामिक गणराज्य की सरकार कमजोर हो।”
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि विदेशी प्रेरित दंगे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी, सोशल मीडिया पर रोक
प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने से रोकने के लिए ईरान सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पहुंच भी सीमित कर दी गई है।
मानवाधिकार संगठनों की कड़ी निंदा
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भी प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को अमानवीय बताया है।
कई सालों बाद इतने बड़े प्रदर्शन
ईरान में इस तरह के बड़े और लंबे प्रदर्शन पिछले कई वर्षों में दुर्लभ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक संकट और जनता की नाराजगी ने इस आंदोलन को हवा दी है।
आगे और बिगड़ सकते हैं हालात
स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। पूरे घटनाक्रम पर विश्व समुदाय की नजर टिकी हुई है।










