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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय: साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ की ओर ऐतिहासिक बदलाव

BPC News National Desk
4 Min Read

देश की प्रशासनिक संरचना में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 78 वर्षों तक साउथ ब्लॉक में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बने ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में शिफ्ट होने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह शिफ्टिंग मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026) के बाद या इसी महीने के भीतर पूरी हो सकती है। इसे नए भारत की आधुनिक और सेवा-उन्मुख कार्य संस्कृति का प्रतीक माना जा रहा है।

सेवा तीर्थ परिसर: आधुनिकता और सेवा का संगम

विजय चौक के निकट, रायसीना हिल के नीचे स्थित सेवा तीर्थ परिसर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का प्रमुख हिस्सा है। इसमें तीन हाई-टेक इमारतें शामिल हैं:

सेवा तीर्थ 1

यह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नया ठिकाना होगा। यहां आधुनिक वर्कस्पेस, भव्य सेरेमोनियल रूम और अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो ‘सेवा’ की भावना को दर्शाती हैं।

सेवा तीर्थ 2

यहां कैबिनेट सचिवालय पहले ही सितंबर 2025 में शिफ्ट हो चुका है।

सेवा तीर्थ 3

यहां राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय होगा। इसकी शिफ्टिंग भी अंतिम चरण में है।

1,189 करोड़ की लागत, L&T ने किया निर्माण

सेवा तीर्थ परिसर का निर्माण लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया है। शुरुआत में इसे ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहा जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया, जो प्रधानमंत्री मोदी के ‘सेवा ही संगठन’ और जन-कल्याण के संकल्प को दर्शाता है।

वर्तमान में परिसर लगभग तैयार है और केवल अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है।

साउथ ब्लॉक का ऐतिहासिक अध्याय समाप्त, नई शुरुआत

साउथ ब्लॉक, जिसे ब्रिटिश वास्तुकार हर्बर्ट बेकर ने 1931 में डिजाइन किया था, आजादी के बाद से PMO का घर रहा है। यहीं से:

  • विदेश मंत्रालय,

  • रक्षा मंत्रालय,

  • और प्रधानमंत्री कार्यालय
    संचालित होते थे।

PMO के शिफ्ट होने के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को ‘युगे युगेन भारत संग्रहालय’ में बदला जाएगा, जिसे आम नागरिकों के लिए खोला जाएगा। इसे औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति और नए भारत की पहचान को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

शुभ मुहूर्त में शिफ्टिंग की तैयारी

शिफ्टिंग का समय भी शुभ माना जा रहा है।
खरमास की अवधि मकर संक्रांति के साथ समाप्त हो रही है, इसलिए:

  • 14 जनवरी से जनवरी के अंत,

  • या फरवरी 2026 की शुरुआत तक
    PMO के शिफ्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में गुप्त नवरात्रि (19–27 जनवरी) के दौरान भी शिफ्टिंग की चर्चा है।

नए भारत की कार्य संस्कृति का प्रतीक

यह बदलाव केवल भौतिक स्थान का नहीं, बल्कि शासन की सोच का भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में:

  • मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस,

  • और सेवा भाव
    को केंद्र में रखा जा रहा है।

सेवा तीर्थ परिसर में:

  • PMO,

  • कैबिनेट सचिवालय,

  • और NSCS
    एक साथ होने से प्रशासनिक तालमेल मजबूत होगा, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।

‘सेवा तीर्थ’ – सिर्फ इमारत नहीं, एक संदेश

नया पता ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक भवन का नाम नहीं है, बल्कि एक संदेश है—

भारत अब पुरानी व्यवस्था से आगे बढ़कर सेवा, आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की राह पर है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस नए कार्यालय से नए भारत की नई शुरुआत होगी, जहां हर निर्णय जन-कल्याण और राष्ट्र-निर्माण के लिए होगा।

राजधानी की तस्वीर बदलेगी, इतिहास बनेगा

यह ऐतिहासिक कदम:

  • दिल्ली की प्रशासनिक संरचना को आधुनिक स्वरूप देगा,

  • सेंट्रल विस्टा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाएगा,

  • और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत के शासन तंत्र में युगांतकारी परिवर्तन साबित होगा।

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