देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने Delhi Gymkhana Club को खाली करने के केंद्र सरकार के आदेश पर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार बेदखली आदेश के बारे में सुना तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उनसे उनका अपना घर छीन रहा हो।
दिल्ली जिमखाना क्लब लंबे समय से राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक और खेल संस्थानों में गिना जाता रहा है। अब केंद्र सरकार की ओर से जारी नोटिस के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
“यह सिर्फ क्लब नहीं, मेरी यादों का हिस्सा है” – किरण बेदी
एक इंटरव्यू में किरण बेदी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उनका इस क्लब से बेहद भावनात्मक रिश्ता रहा है।
उन्होंने बताया कि वह महज 14 वर्ष की उम्र में Amritsar से दिल्ली टेनिस टूर्नामेंट खेलने आया करती थीं। उन्हीं दिनों से दिल्ली जिमखाना क्लब उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।
किरण बेदी ने कहा,
“जब मैंने पहली बार बेदखली आदेश के बारे में सुना तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने अपना घर खो दिया हो। यह केवल एक क्लब नहीं, बल्कि मेरी जिंदगी की यादों और संघर्ष के वर्षों से जुड़ी जगह है।”
दिल्ली से प्यार की शुरुआत भी यहीं से हुई
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़ी यादों ने ही उन्हें दिल्ली से जोड़ दिया था। उन्होंने सपना देखा था कि एक दिन वह इसी शहर में काम करेंगी और यहीं अपना जीवन बिताएंगी।
बाद में उनका यह सपना तब पूरा हुआ जब उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होकर New Delhi में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं।
आखिर क्यों जारी हुआ बेदखली नोटिस?
दरअसल, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय ने हाल ही में दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली नोटिस जारी किया है।
सरकार ने वर्ष 1928 की मूल लीज डीड के क्लॉज 4 का हवाला देते हुए कहा है कि Safdarjung Road क्षेत्र संवेदनशील इलाका है और यहां रक्षा बुनियादी ढांचे तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम जरूरी है।
सरकार की ओर से क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का समय दिया गया है।
मामला पहुंचा अदालत
दिल्ली जिमखाना क्लब प्रबंधन ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है और फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया में है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस प्रतिष्ठित क्लब के भविष्य को तय करेगा।
दिल्ली की विरासत से जुड़ा है क्लब
Delhi Gymkhana Club लगभग 27.3 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और दशकों से देश के वरिष्ठ अधिकारियों, खिलाड़ियों, राजनयिकों और सामाजिक हस्तियों का केंद्र रहा है।
यहां खेल गतिविधियों के अलावा कई सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित होते रहे हैं। यही कारण है कि इसे केवल एक क्लब नहीं बल्कि दिल्ली की ऐतिहासिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा माना जाता है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
किरण बेदी की भावुक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
कुछ लोग सरकार के फैसले को सुरक्षा और प्रशासनिक जरूरतों के लिहाज से सही बता रहे हैं, जबकि कई लोग क्लब की ऐतिहासिक पहचान और विरासत को संरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
विरासत बनाम आधुनिक जरूरतों की बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल जमीन या लीज का मामला नहीं है, बल्कि यह विरासत, इतिहास और आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन का भी बड़ा सवाल बन चुका है।
फिलहाल अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इतना तय है कि इस फैसले ने क्लब से जुड़े पुराने सदस्यों और खेल जगत के लोगों की भावनाओं को गहराई से प्रभावित किया है।








