देहरादून, 19 मार्च 2026: भारत में बढ़ती मोबिलिटी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए Honda Motorcycle and Scooter India (एचएमएसआई) ने अपने उत्पादन विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
कंपनी राजस्थान के टपूकड़ा स्थित प्लांट में तीसरी नई प्रोडक्शन लाइन स्थापित कर रही है, जिससे दोपहिया वाहनों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकेगा।
2028 तक शुरू होगी नई लाइन
नई प्रोडक्शन लाइन को वर्ष 2028 तक शुरू करने की योजना है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 6.7 लाख यूनिट होगी।
इस विस्तार के बाद टपूकड़ा प्लांट की कुल क्षमता बढ़कर 20.1 लाख यूनिट प्रति वर्ष हो जाएगी।
2000 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना के जरिए 2,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
CEO का बयान
त्सुत्सुमु ओटानी (प्रेसिडेंट एवं CEO, HMSI) ने कहा कि भारत मोबिलिटी परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर रहा है और कंपनी इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि यह विस्तार सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और कंपनी को बाजार की मांग के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएगा।
राजस्थान सरकार ने किया स्वागत
भजन लाल शर्मा (मुख्यमंत्री, राजस्थान) ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे राज्य की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने इसे ऑटोमोटिव सेक्टर के विकास के लिए अहम कदम बताया।
भारत में HMSI का विस्तार
Honda Motorcycle and Scooter India देश में चार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट संचालित करता है, जिनकी कुल क्षमता 62.5 लाख यूनिट प्रति वर्ष है।
कंपनी 2001 से अब तक 7 करोड़ से अधिक यूनिट का उत्पादन कर चुकी है।
गुजरात प्लांट में भी विस्तार
मई 2025 में कंपनी ने विठलापुर (गुजरात) प्लांट में चौथी प्रोडक्शन लाइन जोड़ने की घोषणा की थी, जो 2027 तक शुरू होने की संभावना है।
1500 करोड़ का निवेश
टपूकड़ा प्लांट में तीसरी प्रोडक्शन लाइन के लिए कंपनी लगभग ₹1500 करोड़ का निवेश करेगी।
इसके लिए 73,700 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि भी खरीदी जाएगी।
2028 तक 80 लाख यूनिट क्षमता का लक्ष्य
इस विस्तार और अन्य योजनाओं के साथ कंपनी की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 62.5 लाख से बढ़कर 80 लाख यूनिट तक पहुंचने का लक्ष्य है।
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता
Honda के 2050 कार्बन न्यूट्रैलिटी विजन के तहत HMSI सोलर-पावर्ड फैक्ट्रियां, जल संरक्षण और रीसाइक्लिंग जैसे सतत उपायों पर भी काम कर रही है।
निष्कर्ष
होंडा का यह कदम न केवल भारत में बढ़ती दोपहिया मांग को पूरा करेगा, बल्कि रोजगार, निवेश और पर्यावरण संतुलन के जरिए देश की मोबिलिटी इकोनॉमी को भी मजबूत करेगा।









