गाजियाबाद। जैसे ही त्योहारों का सीजन शुरू होता है, खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन अचानक सक्रिय हो जाते हैं। छापेमारी, जब्ती और नकली मिठाइयों, खोया और पनीर को नष्ट करने की खबरें सुर्खियां बनती हैं। लेकिन सवाल यह है कि त्योहार खत्म होते ही यह सतर्कता कहां गायब हो जाती है?
राज नगर एक्सटेंशन में नकली पनीर फैक्ट्री का खुलासा
हाल ही में गाजियाबाद के पॉश इलाके राज नगर एक्सटेंशन के पास एक अवैध फैक्ट्री का खुलासा हुआ है, जहां रोजाना करीब 500 किलो नकली पनीर तैयार कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा है।
यह पनीर मिल्क पाउडर, रिफाइंड तेल, केमिकल्स और अन्य घटकों से बनाया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर खतरा
फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी सीधे नालियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि इस फैक्ट्री में बाल श्रम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

कहां-कहां सप्लाई हो रहा नकली पनीर?
यह नकली पनीर गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में:
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होटलों
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ढाबों
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मिठाई की दुकानों
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घरेलू उपभोक्ताओं
तक पहुंच रहा है। अनजाने में लोग अपने परिवार की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे नकली उत्पाद लंबे समय तक सेवन करने से:
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लीवर डैमेज
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किडनी फेलियर
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पाचन संबंधी समस्याएं
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अन्य गंभीर बीमारियां
हो सकती हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
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खाद्य सुरक्षा विभाग
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नगर निगम
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पुलिस प्रशासन
इस पूरे मामले पर चुप क्यों हैं?
क्या यह केवल लापरवाही है या फिर किसी प्रकार की मिलीभगत?
पहले भी हो चुके हैं ऐसे खुलासे
गाजियाबाद में हाल के महीनों में:
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होली से पहले 1200 से 2500 किलो नकली पनीर जब्त
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अगस्त 2025 में डूंडाहेड़ा में फैक्ट्री पकड़ी गई
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सामग्री में चूहे और छिपकलियां तक मिली थीं
इसके बावजूद ऐसी गतिविधियां लगातार जारी हैं।
जनता की मांग: सालभर हो कार्रवाई
जनता का साफ कहना है कि खाद्य सुरक्षा केवल त्योहारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
जरूरी है कि:
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नियमित छापेमारी हो
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सख्त निगरानी रखी जाए
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दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए:
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हमेशा FSSAI लाइसेंस वाली दुकानों से खरीदें
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पैकेज्ड और ब्रांडेड उत्पाद चुनें
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संदिग्ध खाद्य पदार्थों की तुरंत शिकायत करें
निष्कर्ष
यदि प्रशासन अब भी आंखें मूंदे बैठा रहा, तो यह केवल स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ धोखा है।
समय आ गया है कि मिलावटखोरों के खिलाफ सालभर अभियान चलाया जाए, न कि केवल त्योहारों के दौरान।








