दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख स्टेशनों में शामिल गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाला पेयजल अब चिंता का विषय बन गया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक यहां पानी में टीडीएस (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर 900 के पार पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है।
रोजाना 25 हजार यात्रियों की सेहत पर खतरा
इस स्टेशन से हर दिन करीब 25 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। इनमें नौकरीपेशा लोग, छात्र, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। गर्मी के मौसम में जब पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब स्टेशन पर उपलब्ध पानी ही यात्रियों के लिए बीमारी का कारण बनता नजर आ रहा है।
पानी के स्वाद और गुणवत्ता को लेकर शिकायतें
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर लगे वाटर कूलर और पेयजल पॉइंट से आने वाले पानी का स्वाद काफी खराब है। कई लोगों ने खारापन महसूस होने की बात कही, जबकि कुछ यात्रियों ने पानी पीने के बाद पेट दर्द और गले में जलन जैसी समस्याओं की शिकायत की है।
क्या है TDS और कितना होना चाहिए सुरक्षित स्तर?
टीडीएस यानी टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स पानी में घुले खनिज और अन्य पदार्थों की मात्रा को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- 300–500 TDS: सामान्य और सुरक्षित
- 500–900 TDS: सावधानी की जरूरत
- 900 से अधिक: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
इस स्तर का पानी लंबे समय तक पीने से किडनी, पाचन तंत्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
मजबूरी में पीना पड़ रहा है यही पानी
कई यात्रियों का कहना है कि लंबी यात्रा के दौरान वे यही पानी पीने को मजबूर हैं। हर कोई बोतलबंद पानी खरीदने में सक्षम नहीं होता, खासकर दैनिक यात्री और गरीब वर्ग के लोग। ऐसे में स्टेशन का मुफ्त पेयजल ही उनका एकमात्र सहारा होता है।
रखरखाव और जांच पर उठे सवाल
स्थानीय यात्रियों ने आरोप लगाया है कि पानी की नियमित जांच नहीं हो रही है और आरओ सिस्टम तथा वाटर कूलरों का रखरखाव भी ठीक से नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि इस समस्या की पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि दूषित या अत्यधिक खनिज युक्त पानी से:
- डिहाइड्रेशन
- पेट संक्रमण
- किडनी स्टोन
- पाचन संबंधी समस्याएं
जैसी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी अधिक गंभीर हो सकता है।
रेलवे से तत्काल कार्रवाई की मांग
यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि:
- पानी की तुरंत लैब जांच कराई जाए
- टीडीएस स्तर नियंत्रित किया जाए
- अतिरिक्त आरओ प्लांट लगाए जाएं
- वाटर कूलरों की नियमित सफाई सुनिश्चित हो
सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पानी की गुणवत्ता में लापरवाही हजारों लोगों की सेहत को खतरे में डाल सकती है।
समाधान की ओर निगाहें
गर्मी के इस मौसम में पानी से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर बढ़ते TDS स्तर ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर रेलवे प्रशासन पर है कि वह इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से करता है।







